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Karnataka, Dengue : एलिसा या एनएस-1 के सवाल पर बंटे चिकित्सक और स्वास्थ्य विभाग

निजी चिकित्सकों को कहना है कि वे इस सरकारी आंकड़ों पर इत्तेफाक नहीं रखते हैं। मरीजों की संख्या कई गुना ज्यादा है। क्योंकि ELISA एंटीबॉडी टेस्ट में जब तक पुष्टि न हो जाए तबतक सरकार मामलों को डेंगू नहीं मानती है। प्रदेश के कुछ अस्पताल ही यह जांच करते हैं।

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Alert on getting dengue patients, larvae being tested in homes, mosquitoes growing in rainy water

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-एलिसा ज्यादा भरोसेमंद पर हो जाती है देरी
-लगातार बढ़ रही डेंगू मरीजों की संख्या

बेंगलूरु. प्रदेश में इस वर्ष सोमवार तक dengue के मच्छरों ने 6463 लोगों को अपना शिकार बनाया है। इनमें से 3822 लोग बेंगलूरु से हैं। तीन लोगों की मौत भी हुई है। हालांकि निजी चिकित्सकों को कहना है कि वे इस सरकारी आंकड़ों पर इत्तेफाक नहीं रखते हैं। मरीजों की संख्या कई गुना ज्यादा है। क्योंकि ELISA एंटीबॉडी टेस्ट में जब तक पुष्टि न हो जाए तबतक सरकार मामलों को डेंगू नहीं मानती है। प्रदेश के कुछ अस्पताल ही यह जांच करते हैं।

ज्यादातर अस्पताल NS- 1 जांच के आधार पर डेंगू की पुष्टि और उपचार करते हैं जिसे सरकार नहीं मानती है। ज्यादातर चिकित्सकों का कहना है कि एनएस-1 जांच में डेंगू की पुष्टि हो तो आगे जांच की जरूरत नहीं पड़ती है। उपचार में भी देरी होती है। एक अन्य बड़े अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि अस्पताल में एनएस-1 एंटीजेन जांच में डेंगू की पुष्टि होने के बाद जरूरत पडऩे पर मरीज को Hospital में भर्ती किया जाता है।

मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हर दिन 10-12 मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। बिस्तर कम पड़ रहे हैं, लेकिन एलिसा टेस्ट नहीं होने के कारण बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (BBMP) और स्वास्थ्य विभाग भी ऐसे मरीजों की गिनती नहीं करता है।
हालांकि बीबीएमपी में मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. के. वीजेन्द्र का कहना है कि अस्पताल नियमित रूप से मरीजों की जानकारी भेजते हैं। किसी भी अस्पताल की अनदेखी नहीं हो रही है। बावजूद इसके वे पूरे मामले की समीक्षा करेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि मानक प्रोटोकॉल के रूप में एलिसा परीक्षण अनिवार्य है। यह ज्यादा भरोसेमंद है।