
सप्ताह भर बाद भी 'अधूरी सरकार'
बेंगलूरु. राज्य में जनता दल (ध) -कांग्रेस गठबंधन के सत्ता संभालने के सप्ताह भर बाद भी सरकार 'अधूरीÓ है। मुख्यमंत्री एच. डी. कुमारस्वामी के पास सिर्फ उपमुख्यमंत्री के तौर पर डॉ जी परमेश्वर हैं, लेकिन मंत्रिमंडल के अभाव में सरकार पूरी तरह रंग में नहीं आ पाई है।
गठबंधन के दोनों घटकों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण अभी तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पाया है। २३ मई को विधानसौधा परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुमारस्वामी और परमेश्वर ने शपथ ली थी। हालांकि, दोनों ही पार्टियों के नेताओं का कहना है कि बुधवार तक विभागों के बंटवारे का मामला सुलझ जाएगा और जल्द ही मंत्रिमंडल का गठन हो जाएगा।
जद (ध) के एक नेता ने कहा कि ७७ विधायकों के बावजूद मुख्यमंत्री का पद छोडऩे के बाद कांग्रेस अपने कोटे में ज्यादा से ज्यादा महत्वपूर्ण विभाग चाहती है जबकि सिर्फ ३७ विधायकों वाला जद (ध) भी विधानसभा अध्यक्ष का पद कांग्रेस को देने के बाद अपने कोटे में कम से कम पांच महत्वपूर्ण विभाग चाहता है। दोनों दलों के बीच वित्त को लेकर सबसे ज्यादा खींचतान थी, लेकिन अब कांग्रेस इस पर झुकने को तैयार हो गई है तो बाकी विभागों को लेकर जद (ध) भी लचीला रुख अपनाने को राजी दिख रहा है। दोनों दलों के बीच सरकार के गठन से पहले हुए समझौते के मुताबिक ३४ सदस्यीय मंत्रिमंडल में से मुख्यमंत्री सहित १२ पद जद (ध) और उप मुख्यमंत्री सहित २२ पद कांग्रेस को मिलने हैं।
कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस लोक निर्माण के अलावा उद्योग और राजस्व विभाग जद (ध) को देने के लिए तैयार है, लेकिन ऊर्जा, समाज कल्याण, सिंचाई, जल संसाधन, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आवास, बेंगलूरु विकास, पर्यटन, उत्पाद, गृह, खनन और चीनी विभाग अपने पास रखना चाहती है। जद (ध) के एक नेता ने कहा कि हमें सिर्फ उद्योग और लोक निर्माण विभाग मिल रहा है। तीसरा विभाग राजस्व है, जिसका आज के दौर में कोई ज्यादा महत्व नहीं रह गया है। यह पर्याप्त नहीं है। जद (ध) के एक नेता ने कहा कि कुमारस्वामी भले ही बयानों से कांग्रेस पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके पास फिलहाल कोई दूसरा राजनीतिक विकल्प नहीं है और कांगे्रस की शर्तें मानना उनकी विवशता है। इसलिए वित्त को छोड़कर बाकी विभागों पर सहमति बन जाने के आसार हैं।
दिल्ली दौरे पर गए कुमारस्वामी ने सोमवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद से भी विभागों के बंटवारे को लेकर चर्चा की थी। इसमें कुमारस्वामी ने स्पष्ट संकेत दिया था कि वे कांग्रेस को उसकी राजनीतिक ताकत और विधायकों की संख्या के हिसाब से विभाग देने को लेकर लचीला रुख अपनाने को तैयार हैं लेकिन वित्त विभाग को लेकर वे अडिग दिखे। आजाद को ही आलाकमान ने विभागों के बंटवारे से जुड़े मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी दी हुई है। कांग्रेस नेता मंगलवार को भी दिनभर दिल्ली में विभागों के बंटवारे को लेकर बैठकों में व्यस्त रहे। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को दिल्ली में कहा कि जल्द ही सारे मसले सुलझ जाएंगे। गठबंधन में ऐसी समस्याएं आती रहती हैं। हम निश्चित तौर पर मिलजुल कर काम करेंगे।
इससे पहले वर्ष २००४ में भी जब कांग्रेस ने जद (ध) के साथ मिलकर धरमसिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई थी तब भी दोनों दलों के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर काफी खींचतान हुई थी। अंतत: दोनों दलों के बीच लगभग बराबरी के अनुपात में विभागों का बंटवारा हुआ था। उस वक्त जद (ध) के पास ५८ विधायक थे। इस बार भी कांग्रेस ने अपने कोटे से दो उपमुख्यमंत्री बनाने का प्रस्ताव शुरुआती दौर में रखा था लेकिन कुमारस्वामी उसके लिए राजी नहीं हुए। राजनीतिक हलकों में चर्चा थी कि गठबंधन विधायकों को ऑपरेशन कमल से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कांग्रेस नेता डी. के. शिवकुमार भी उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार हैं, लेकिन जद (ध) ने दो उपमुख्यमंत्री पद के सुझाव को स्वीकार नहीं किया। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार में हो रही देरी से मंत्री बनने के आकांक्षी दोनों दलों के विधायक भी परेशान हैं। दोनों ही दलों में मंत्री पद के लिए नेता लॉबिंग में जुटे हैं। सिद्धरामय्या सरकार मेंं मंत्री रहे करीब दर्जन भी नेता भी वापसी के लिए लॉबिंग कर रहे हैं। नए विधायक भी नेताओं के घरों का चक्कर काट रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि विस्तार १ जून के बाद ही होने की संभावना है।
कुमार ने संभाला मोर्चा, की कई बैठकें
मंत्रिमंडल का गठन नहीं होने के बावजूद कुमारस्वामी अब राजनीतिक मसलों को छोड़कर प्रशासनिक तौर पर सक्रिय हो रहे हैं। मंगलवार को कुमारस्वामी ने अधिकारियों के साथ कई अलग-अलग बैठकें कीं। इसके अलावा कुमारस्वामी ने जनता दर्शन में भी लोगों की समस्याएं सुनीं।
Published on:
30 May 2018 01:21 am
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