
बाहरी सुंदरता से ज्यादा मूल्यवान है भीतरी सुंदरता
सिरसी-कारवार. सोंदा स्वर्णवल्ली महासंस्थान मठ के प्रमुख गंगाधरेंद्र सरस्वती ने कहा है कि शंकराचार्य के संदेश का तात्पर्य यही था कि हमें अपने जीवन के दृष्टिकोण में बदलाव लाना चाहिए। बाहरी सुंदरता की अपेक्षा भीतरी सुंदरता अधिक मूल्यवान है। वे सरस्वती सिरसी तालुक के सोंदा क्षेत्र स्वर्णवल्ली मठ में आयोजित शंकर जयंती कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धि हासिल करने वालों को साधना शंकर पुरस्कार सम्मान से नवाजा गया।
गंगाधरेंद्र सरस्वती ने कहा कि शरीर मांस, मज्जा व हड्डी का ढांचा है। सबसे प्रमुख बात यह है कि हर प्राणी के अंदर एक जीव है। किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके अंतर्मन से ही होती है। बाहर से देखने के बजाय भीतरी मन को जानो। जरूरी नहीं है कि जो व्यक्ति बाहर से सुंदर दिखता हो वह भीतर से भी उतना ही सुंदर हो।
उन्होंने कहा कि मुक्ति का मार्ग तो गुरु ही दिखा सकते हैं। शंकर भाष्य पारायण, शंकर के चित्र का अनावरण, स्वर्णवल्ली गुरुपरंपरा के चित्र सभागृह में बने हैं। शंकर जयंती के उपलक्ष्य में स्वर्णवल्ली महासंस्थान की ओर से साधना शंकर पुरस्कार अनुसंधानकर्ता तथा जाने-माने विद्वान वी.डी. सूर्यनारायण भट्ट हित्लल्ली को तथा सामाजिक सेवा के लिए डॉ. राजाराम हेगड़े दोड्डूरु को दिया गया।
पुरस्कार स्वीकार करने के उपरांत अनुसंधानकर्ता तथा जाने-माने विद्वान वी.डी. सूर्यनारायण भट्ट हित्लल्ली ने कहा कि यदि शंकर जयंती इसी तरह हर वर्ष मनाई जानी चाहिए। साधना शंकर पुरस्कार स्वीकार करने के उपरांत चिकित्सक डॉ. राजाराम हेगड़े दोड्डूरु ने कहा कि इस पुरस्कार को प्राप्त करने के बाद अब उनकी जिम्मेदारी पहले की अपेक्षा और अधिक हो गई है।
श्री क्षेत्र सोंदा स्वर्णवल्ली महासंस्थान के मठप्रमुख गंगाधरेंद्र सरस्वती की लिखे गए दिव्यदीप्ति नामक ग्रंथ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में गणेश पंचरत्न, श्रीशारदाभुजंग, श्रीतोटकाष्टक का पठन किया गया। कार्यक्रम के अवसर पर उज्जयिनी श्रीमहाकालेश्वर मंदिर के ट्रस्टी गोविंद शर्मा, वी.एन. हेगड़े बोम्मनल्ली सहित कई उपस्थित थे।
Published on:
13 May 2019 01:16 am
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