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एफकेसीसीआई को नई सरकार से खासी उम्मीदें

एफकेसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष से बातचीत नया कृषि कानून वापस लेने का आग्रह

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एफकेसीसीआई को नई सरकार से खासी उम्मीदें

एफकेसीसीआई को नई सरकार से खासी उम्मीदें

बेंगलूरु. एफकेसीसीआई को नवगठित कांग्रेस सरकार से आमजन, व्यापारियाें, उद्यमियों व कृषकों को खासी उम्मीदें हैं। कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र के मुताबिक प्रदेश के उद्यमी, व्यापारी, सेवा सेक्टर व कृषक वर्ग चाहता है कि उन्हें अपना काम करने में आसानी हो।

इस संबंध में एफकेसीसीआई के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश लाहोटी ने पत्रिका से विशेष भेंट में कहा कि हम नवगठित कांग्रेस सरकार से आग्रह करते हैं कि चुनाव घोषणा पत्र में किए गए सभी वायदे पूरा करे। ताकि हर वर्ग को राहत मिल सके। उन्होंने कहा कि व्यापार लाइसेंस नवीनीकरण, फीस भुगतान प्रक्रिया सभी ऑननाइन के माध्यम से जमा करा रहे हैं। विभाग भुगतान स्वीकार भी कर रहा है। लेकिन राशि जमा कराने का प्रमाण पत्र उनको अभी तक नहीं मिल रहा है। प्रमाण पत्र या कोई अन्य दस्तावेज लेने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बाद ही प्रमाण पत्र व अन्य दस्तावेज मिल रहे हैं।लाहोटी ने बताया कि चुनाव से पूर्व सभी दलों के नेता एफकेसीसीआ्ई में आए थे। उन्हें भी इस समस्या से अवगत कराया गया था। उन्होंने कहा कि आयकर और जीएसटी विभाग प्रत्येक भुगतान की रसीद ऑनलाइन देते हैं। इसी प्रकार लाइसेंस नवीनीकरण व अन्य फीस भुगतान की रसीद व प्रमाण पत्र उन्हें ऑनलाइन ही मिलने चाहिए ताकि व्यापारी, उद्यमियों, सर्विस सेक्टर व किसानों को सरकारी विभागों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। उन्होंने लाइसेंस नवीनीकरण, फीस भुगतान प्रणाली के सरलीकरण की भी मांग की।

नया कृषि कानून वापस ले सरकारउन्होंने कहा कि भारत सरकार एक वर्ष पूर्व ही नया कृषि कानून को वापस ले चुकी है। राज्य सरकार को भी किसानों व मंडी व्यापारियों को राहत देते हुए कृषि कानून वापस लेना चाहिए। जबकि उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश पहले ही कृषि कानून को खत्म कर चुके हैं। गत भाजपा सरकार ने नया कृषि कानून लाकर जो गलती की थी। वर्तमान सरकार उसे सुधारे तो लाखों किसानों व मंडी व्यापारियों को लाभ हो सकता है।

पंचायती कर भी हो कमलाहोटी ने बताया कि औद्योगिक क्षेत्र में जो भी उद्योग है। उन पर केआईडीबी के अनुसार पंचायती कर लगता है। यह कर बहुत ज्यादा है। इससे उद्योग को चलाना बहुत मुश्किल हो रहा है। इस पर सरकार गंभीरता से विचार करे और इसे कम कर उद्यमियों को राहत प्रदान करे।