
World Heritage हम्पी के करीब पहुंचा पानी, मचा हडक़म्प
बल्लारी. जलतांडव से जूझ रहे कर्नाटक के विश्व धरोहर स्थलों को बाढ़ ने अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। बल्लारी जिले में तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित विश्व धरोहर स्थल हम्पी भी रविवार को बाढ़ के पानी से घिरने लगा। तुंगभद्रा जलाशय से रविवार सुबह करीब 1.70 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से हम्पी के आसपास के इलाके पानी में डूब गए। पानी का फैलाव तेजी से हम्पी विरासत स्थलों की ओर बढऩे से अधिकारियों में हडक़ंप मच गया है।
जिला प्रशासन ने नदी के किनारे रहने वाले निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए कहा है क्योंकि तुंगभद्रा बांध के सभी 33 द्वार एक साथ खोल दिए गए हैं।
पश्चिमी घाट के कैचमेंट क्षेत्रों में पिछले एक सप्ताह से लगातार हो रही बारिश के कारण तुंगभद्रा में पानी का अंतर्वाह दो लाख क्यूसेक से अधिक पहुंच जाने के बाद बांध के सभी गेट खोले गए हैं।
हालांकि अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता हम्पी को लेकर है। यूनेस्कों की विरास्त स्थलीय सूची में शामिल हम्पी का समृद्ध वास्तुकला पूरी दुनिया के पर्यटकों का आकर्षण केंद्र है। यह विजयनगर साम्राज्य का प्रतीक है जिसमें कई धरोहर हैं। सूत्रों के अनुसार बाढ़ का पानी कामपल्ली किले के सामने पहुंच गया है जिससे अंजनेय मंदिर परिसर भी आंशिक रूप से जलमग्न हो गया है। ऐसे में अगर तुंगभद्रा बांध से और ज्यादा पानी छोड़ा जाता है तो हम्पी को भारी नुकसान हो सकता है।
यूनेस्को विरासत स्मारक पट्टकल मंदिर भी डूबा
इससे पहले यूनेस्को के विरासत स्मारकों में शामिल बागलकोट जिले के पट्टकल मंदिर भी बाढ़ की चपेट में आ गए थे। नविलुतीर्थ बांध से मलप्रभा नदी में भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने से विश्व धरोहर मंदिरों में शामिल स्मारक पानी में डूब गए। बागलकोट के उपायुक्त रामचंद्रन के अनुसार, पट्टकल में चालुक्यों द्वारा निर्मित नौ हिंदू मंदिर और एक जैन स्मारक शुक्रवार को जलमग्न हो गए थे और पानी तेजी से बढऩे के कारण मंदिर परिसर और आसपास करीब ५ फीट पानी चढ़ चुका है। बादामी के पास पट्टकल के स्मारकों का निर्माण छठी और 8 वीं शताब्दी के बीच चालुक्य शासन काल में किया गया था।
Published on:
11 Aug 2019 07:56 pm
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