विधानसभा में मंगलवार को डीएसपी गणपति की आत्महत्या के मसले पर नियम-6 9 के तहत बहस जारी रखते हुए कुमार ने एक उदाहरण देते कहा कि उत्तर प्रदेश में आत्महत्या से पहले ललिता कुमारी के अंतिम बयान को सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ ने मान्य करार दिया और उसी आधार पर संबंधित लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर एक नजीर पेश की थी।
ऐसे में इस मामले में सरकार गणपति के अंतिम बयान के आधार पर के.जे. जार्ज, के अलावा दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराए। कुमारस्वामी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रकरण को दबाने की कोशिश कर रही है। मंत्री को बचाने के लिए सरकार गणपति को मानसिक रोगी करार देने पर तुली है।
पश्चिमी रेंज के आईजीपी जे.सी. चक्रवर्ती ने गणपति को अच्छा अधिकारी बताते हुए कहा था कि वे अक्सर उनके साथ कानून-व्यवस्था के अलावा पुलिस से जुड़े कई मसलों पर चर्चा करते थे। वहीं कोडग़ू के पुलिस अधीक्षक राजेन्द्र प्रसाद का कहना है कि गणपति ने अवसाद के कारण आत्महत्या की है। इससे साफ होता हैकि सरकार सच्चाई सामने नहीं आने देना चाहती।
विपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर ने बीच में दखल देते हुए कहा कि गणपति के पिता कुशालप्पा जब अपने पुत्र की मौत के गम में डूबे हुए थे उस वक्त पुलिस ने उनसे एक बयान पर हस्ताक्षर ले लिए, जिसे बाद में शिकायत में परिवर्तित कर दिया गया। जबकि कुशालप्पा ने इस तरह का बयान देने से साफ मना किया है। जिस लॉज में गणपति ने आत्महत्या की थी उसके कमरे से पुलिस को एक पैन ड्राइव तथा दो हस्त लिखित कागज मिलेथे, जो अब गायब हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि सरकार डीएसपी कलप्पा हंडीबाग के साथ भी ऐसा बर्ताव कर रही है जैसे वे अपहरण व फिरोती में लिप्त थे। सीआईडी अधिकारी कलप्पा के परिवार को लगातार परेशान कर रहे हैं। कलप्पा किसी अपहरण की साजिश में शामिल नहीं थे। कलप्पा ने चिक्कमगलूरु में अवैध बजरी खनन को रोकने का प्रयास किया था। उनकी इस कार्रवाई से खफा कुछ लोगों ने कलप्पा को झूठे केस में फंसाया दिया था।
जांच में निर्दोश पाए जाने के बाद भी तो जार्ज को पुन: मंत्री बनाया जा सकता है। मुख्यमंत्री को चाहिए कि वे राज्य में अधिकारियों को और आत्महत्या करने पर विवश न होने दें। भाजपा के के.जी.बोपय्या, सी.टी.रवि कांग्रेस के बागी नड़हल्ली सहित अन्य कई सदस्यों ने बहस में भाग लिया।