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आचार्य भिक्षु के तपोबल के आगे देव भी झुक गए

अनुशासन रैली तेरापंथ भवन से निकाली गई

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आचार्य भिक्षु के तपोबल के आगे देव भी झुक गए

बेंगलूरु. साध्वी कंचनप्रभा ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने 258 वर्ष पूर्व सुचिन्तित सैद्धान्तिक निर्णय के साथ पुन: चारित्र का प्रत्याख्यान किया। तब के संत भीखण थे। उन्होंने कहा कि आज उनके तेले की तपस्या थी। आचार्य भिक्षु के त्याग तपोबल के समक्ष देव भी झुक गए।

साध्वी ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि वे बीहड़ जंगल में चले, परंतु आज तेरापंथ राजमार्ग है। साध्वी मंजूरेखा ने कहा कि आचार्य भिक्षु ने प्रज्ञा और पुरुषार्थ के साथ आत्म अस्तित्व को ढूंढ़ा तथा पद सुख सुविधा आदि ठुकरा कर आज के गुरु पूर्णिमा के दिन अमित आत्म्बल के साथ नए मार्ग पर चल पड़े। साध्वी उदतप्रभा, साध्वी निर्भयप्रभा, साध्वी चेलनाश्री ने आचार्य भिक्षु के जीवन पर गीत का संगान किया।

अनुशासन रैली तेरापंथ भवन से निकाली गई, जिसमें आदर्श संघ विद्यालय के विद्यार्थी एवं तेयुप, महिला मंडल ज्ञानशाला के कार्यकर्ता शामिल थे।
सभा अध्यक्ष मूलचंद नाहर ने स्वागत किया। अणुव्रत समिति के उपाध्यक्ष देवराज रायसोनी ने श्रावक निष्ठा पत्र का वाचन किया। महिला मंडल व ज्ञानशाला प्रशिक्षकों ने गीतिका पेश की। दीपचंद नाहर ने तेरापंथ स्थापना दिवस पर प्रकाश डाला। चातुर्मास कार्यक्रमों की समायोजना का कार्ड साध्वी को भेंट किया।


अंधेरे से प्रकाश की ओर ले जाता है गुरु
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआईटीबी चौल्ट्री में श्रुत मुनि व अक्षर मुनि ने कहा कि गुरु पूर्णिमा आध्यात्मिक पर्व है।
उन्होंने कहा कि गुरु का अर्थ है अंधेरे से प्रकाश की तरफ ले जाने वाला। गुरु के बाएं पैर के अंगूठे को स्पर्श करने मात्र से भक्तों को अज्ञान का नाश होता है और उनमें समाहित गुण हमारे जीवन की दशा और दिशा को सही राह प्राप्त होती है। संघ अध्यक्ष संपत कोठारी ने स्वागत किया।

खेतेश्वर महाराज का दरबार सजाया
बेंगलूरु. खेतेश्वर युवाम की ओर से होसूर रोड स्थित लालबाग प्राचीन हनुमान मंदिर के परिसर में गुरु पूर्णिमा के अवसर पर खेतेश्वर गुरु महाराज का भव्य दरबार सजा। रात्रि में भजन कार्यक्रम में शंभूदयाल पारीक ने भगवान गणेश को मनाते हुए कई गुरु वंदना एवं रामसा पीर बाबा व गो महिमा पर भजनों की प्रस्तुतियां दे समां बांध दी। गायक सुरेश पारीक ने माता-पिता के भजन की प्रस्तुति पर भक्तों को भाव विभोर कर दिया। श्रोताओं ने देर रात तक भजनों का आनंद लिया।