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भगवान को मनुष्य का हृदय पसंद है-साध्वी भव्यगुणाश्री

धर्मसभा का आयोजन

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भगवान को मनुष्य का हृदय पसंद है-साध्वी भव्यगुणाश्री

भगवान को मनुष्य का हृदय पसंद है-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. चिंतामणि पाश्र्वनाथ जैन श्वेताम्बर चेरिटेबल ट्रस्ट महालक्ष्मी लेआउट जैन संघ में विराजित साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि मंदिर में इंसान की चलती है और हृदय में भगवान की। अपनी बुराई समझ में आने के बाद भी उसे ना त्यागने का अर्थ है, उस बुराई की गुलामी...स्वीकार कर लेना। अहंकार ऐसा है कि इसे चाहिए, चाहिए और चाहिए। कभी इसका पेट भरता ही नहीं और प्रेम ऐसा है कि कुछ भी नहीं होते हुए भी दिए बिना रहा जाता नहीं। अर्जन के साथ विसर्जन जरूरी है। जिस व्यक्ति के दिल में सरलता का वास होता है वह औरों के दिल में अपना निवास बना लेता है। जिस प्रकार एक पहिए वाले रथ की गति संभव नहीं है, उसी प्रकार पुरुषार्थ के बिना केवल भाग्य से कार्य सिद्ध नहीं होते हैं।
साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि लगन एक छोटा सा शब्द है लेकिन जिसे लग जाती है उसका जीवन बदल देती है। नरेश बंबोरी ने बताया कि 28 अक्टूबर को होने वाले 108 जोड़ायुक्त उवसग्गहरं महापूजन की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें भीकमचंद दक, गौतमचंद लूणिया, पारस भंसाली, सुनील कुंकुंलोल, नरेश बंबोरी, निकेश भंडारी, विजयराज चुत्तर, चेतन प्रकाश झारमूथा, निलेश लोढ़ा, राकेश दांतेवाडिय़ा, विनोद भंसाली, मनीष बंबोरी, अरिहंत गादिया, दिनेश छाजेड़, प्रकाश चोपड़ा, रतन माराज ने साध्वी से तैयारियों पर चर्चा की। अभिषेक का लाभ कल्याण मेहता, नवीन, राहुल, देवांश, इंदरचंद, मुनिलाल कानूंगा मेहता परिवार ने लिया।