
अनुसंधान गतिविधियों के लिए पर्याप्त धन आवंटित करे सरकार व यूजीसी : डॉ. मंजूनाथ
जयदेव इंस्टीट्यूट फॉर कार्डियोवास्कुलर साइंसेज एंड रिसर्च के पूर्व निदेशक डॉ. सी. एन. मंजूनाथ ने लगभग सभी विश्वविद्यालयों में धन की कमी के कारण अनुसंधान के पिछडऩे पर चिंता व्यक्त की और राज्य सरकार व विश्वविद्यालय अनुदान (यूजीसी) आयोग से अनुसंधान गतिविधियों के लिए पर्याप्त धन आवंटित करने का आग्रह किया।
वे रविवार को मैसूर विश्वविद्यालय के 104वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्व के बाकी हिस्सों की तुलना में भारत में विश्वविद्यालयों में अनुसंधान गतिविधियों के लिए धन का आवंटन सबसे कम है। बिना शोध के कोई प्रगति, कोई नवप्रवर्तन और कोई नया विचार नहीं आ सकता। सहानुभूति, स्वास्थ्य शिक्षा, ऊर्जा, पर्यावरण और उद्यमिता देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
पहला 'जी' गुरु , दूसरा 'जी' भगवान
डॉ. मंजूनाथ ने कहा कि डिजिटल प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया ने ज्ञान और विचारों के प्रसार में क्रांति ला दी है, लेकिन यह भी सच है कि यह एक दोधारी हथियार है। आज हम बात कर रहे हैं 3जी/4जी सुविधाओं की। इन 'जी' के पास कुछ भी नया नहीं है। पहला 'जी' गुरु हैं, दूसरा 'जी' भगवान हैं, तीसरा 'जी' मार्गदर्शक है और निश्चित रूप से चौथा 'जी' गूगल है।
मानसिक तनाव में वृद्धि
डॉ. मंजूनाथ ने युवाओं को अपने स्वास्थ्य और शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देने की सलाह दी क्योंकि आजकल हमारे समाज में एक बड़ी समस्या युवाओं में आत्मविश्वास की कमी और मानसिक तनाव में वृद्धि है। 17 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं में रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग, कैंसर, स्क्रीन की लत आदि होने का खतरा रहता है। अतीत में, बच्चे अपने माता-पिता को अस्पतालों में ला रहे थे। अब माता-पिता अपने बच्चों को अस्पतालों में ला रहे हैं।
कृष्णा, सीताराम, भाष्यम स्वामी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि
पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा, शिक्षाविद् और पूर्व मंत्री एम.आर.सीताराम एवं नरसिम्हा क्षेत्र, मैसूरु के प्रमुख भाष्यम स्वामी को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई।
मेघना ने जीते 15 स्वर्ण पदक
मेघना एच.एस. ने रसायन विज्ञान (एमएससी ) में 15 स्वर्ण पदक और पांच नकद पुरस्कार जीते जबकि दर्शन डी. ने पांच स्वर्ण पदक और दो नकद पुरस्कार हासिल किए। बीएससी की रोशनी वी.पी. में पांच स्वर्ण पदक और पांच नकद पुरस्कार जीते। 32,249 उम्मीदवारों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें करीब 62 फीसदी महिलाएं हैं। 252 छात्रों ने 436 स्वर्ण पदक और 266 नकद पुरस्कार जीते। इनमें 174 महिलाएं हैं।
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने समारोह की अध्यक्षता की। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एन. के. लोकनाथ, कुलसचिव वी. आर. शैलजा, कुलसचिव (मूल्यांकन) के. एम. महादेवन भी समारोह में उपस्थित थे।
Published on:
04 Mar 2024 06:38 pm
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