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तुंगभद्रा नाला जल उपयोग में सरकार विफल

जगदीश शेट्टर ने कहा है कि तुंगभद्रा नाले में पानी होने के बावजूद इसे वैज्ञानिक तौर पर इस्तेमाल नहीं

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Jagdish Shettar

हुब्बल्ली. विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर ने कहा है कि तुंगभद्रा नाले में पानी होने के बावजूद इसे वैज्ञानिक तौर पर इस्तेमाल नहीं करने के कारण आसपास के किसानों की ओर से उगाई गई फसल बर्बाद हुई है, जिससे हजारों करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।


पत्रकारों से बातचीत में शेट्टर ने कहा कि सरकार की लापरवाही तथा अवैज्ञानिक मानसिकता से तुंगभद्रा नदी आश्रित किसानों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। तुंगभद्रा नदी में किसानों के इस्तेमाल के लिए जरूरी पानी उपलब्ध है। आसपास के किसानों ने नदी जल के भरोसे हजारों करोड़ रुपए खर्च कर धान उगाया है परन्तु जलापूर्ति नहीं होने के कारण हजारों करोड़ रुपए नुकसान झेला है। एक एकड़ को 25 से 30 हजार रुपए देने का सरकार पर दबाव बनाया गया था परन्तु सरकार ने इससे उसका कोई सरोकार ही नहीं है ऐसा बर्ताव कर किसानों के साथ खिलवाड़ कर रही है।


आपात स्थिति निर्माण
मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या जहां भी जाते हैं आपात स्थिति निर्माण होती है। पिछले सप्ताह मंगलवार को सिद्धरामय्या ने कोप्पल का दौरा किया था, इस दौरान किसान तथा अन्य संगठनों ने उनके सामने अपनी पीड़ा बताने का मौका मांगा था। मौका नहीं देने पर घेराव, प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी थी।

मुख्यमंत्री के आने पर प्रदर्शन, हो-हल्ला नहीं होना चाहिए इसके चलते सतर्कता के तौर पर पुलिस की ओर से प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। भाजपा नेताओं को भी गिरफ्तार कर हो-हल्ला को मौका दिया। यह आपात स्थिति का एक और मुखौटा है। सिद्धरामय्या ऐसे हालात का निर्माण कर रहे हैं कि लोकतंत्र में प्रदर्शन के लिए मौका ही नहीं है। तुरन्त गिरफ्तार किसानों तथा नेताओं को रिहा करना चाहिए। किसानों से मुलाकात कर मुख्यमंत्री को उनकी समस्याओं को सुनना चाहिए।


अनुदान का नहीं किया उपयोग
केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को अब तक सीआरएफ कोष से छह हजार करोड़ रुपए दिए हैं। प्रथम चरण में चार हजार करोड़, दूसरे चरण में दो हजार करोड़ रुपए मंजूर किया है परन्तु राज्य सरकार ने अब तक केवल दो हजार करोड़ रुपए मात्र इस्तेमाल किया है। इस बारे में पूछने पर सीआरएफ कोष पूरा इस्तेमाल करने पर सरकार पर भार होगा कह कर वर्ष में केवल 500 करोड़ रुपए ही इस्तेमाल किया जा रहा है कह कर जवाब दे रहे हैं। इससे ही पता चलता है कि विकास के मुद्दे पर सरकार की इच्छाशक्ति कितनी है।


उन्होंने कहा कि हुब्बल्ली-धारवाड़ महानगर निगम क्षेत्र के किसानों की फसलबीमा का भुगतान किया है, मौजूदा वर्ष अत्यधिक फसल नुकसान हुई है परन्तु अब तक उन्हें किसी प्रकार का कोई मुआवजा नहीं मिला है। हुब्बल्ली तालुक के 22 गांवों को यूएलबी बीमा इकाई कहकर अधिसूचित कर शहर क्षेत्र के कुछ गांवों को इसमें शामिल किया गया है।

12 हजार 96 2 हेक्टेयर क्षेत्र इस इकाई में शामिल किया गया है, जो बारिश की मात्रा सही तौर पर चिह्नित कर बीमा राशि निर्धारित करना अवैज्ञानिक है। तीन-चार गांवों को शामिल कर फसल बीमा इकाई बनाने पर बारिश के पैमाने के अनुसार बीमा राशि निर्धारित किया जा सकता है। इस बारे में जिला प्रशासन तथा कृषि मंत्री को पत्र लिखकर बताया गया है।