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किसानों के साथ किए वादे पूरे करे सरकार: मेधा

कुमारस्वामी के लिए परीक्षा की घड़ी

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किसानों के साथ किए वादे पूरे करे सरकार: मेधा

बेंगलूरु. केंद्र और राज्य सरकारों की आलोचना करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर ने कहा कि सरकारें ना तो किसानों के साथ किए गए वादे पूरे कर रही है और ना ही उनके साथ खड़ी है।
यहां शुक्रवार को एक निजी कार्यक्रम में भाग लेने आई पाटकर ने कहा कि किसानों के साथ कांग्रेस और जद-एस गठबंधन सरकार ने जो वादा किया है उसे पूरा करना चाहिए। राज्य में आंदोलन कर रहे किसानों का जिक्र करते हुए नर्मदा बचाओ आंदोलन की वरिष्ठ कार्यकर्ता ने कहा कि जब तक किसान विरोध प्रदर्शन पर नहीं उतरते और अपनी आवाज बुलंद नहीं करते नेता सुनते ही नहीं। यहां तक की केंद्र सरकार से किसानों के कल्याण के लिए बार-बार आग्रह करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब तक सरकार संसद में कानून नहीं बनाती किसानों को उचित न्याय नहीं मिलेगा। यह सबको पता है कि कर्नाटक में क्या हो रहा है। सरकार के सभी कार्यक्रम वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखकर केंद्रीत है। सरकार बनने के बाद घोषणापत्र रद्दी बन जाता है। राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी के लिए यह परीक्षा की घड़ी है और उन्हें इसमें पास होना चाहिए।
उन्होंने देश के युवाओं का आह्वान किया कि वे आगामी 29 और 30 नवम्बर को दिल्ली पहुंचे और किसानों के साथ उनके आंदोलन में शामिल हों। वे सरकार के समक्ष चार प्रमुख मांगें रखेंगे। इनमें किसानों को ऋण मुक्त करने, उनके उत्पादन लागत की तुलना में डेढ़ गुणा कीमत देने, एक किसान को 2500 रुपए पेंशन देने और 7 वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग रखी जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि वो सरदार बल्लभ भाई पटेल की मूर्ति के खिलाफ नहीं है लेकिन सरकार ने सरदार सरोवर बांध के साथ जो गैरकानूनी काम किया है उसके खिलाफ हैं। इस मूर्ति और पयर्टन के चलते 35 हजार किसान और 37 हजार मछुआरे प्रभावित हुए हैं। पाटकर ने बेंगलूरु की यातायात जाम समस्या का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार और पूंजीपतियों का ध्यान फ्लाइओवर व ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के निर्माण और उसके सौंदर्यीकरण पर है। उनकी कोशिश सड़क पर और कारें उतारने पर है न कि सार्वजनिक परिवहन बढ़ाने पर। उन्हें खुद हवाई अड्डे से शहर में आने के दौरान लंबा सफर तय करना पड़ा।

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