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राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने खनिज कर विधेयक लौटाया, राज्‍य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा

कांग्रेस प्रवक्ता बीएल शंकर ने कहा, यह विधेयक समुदाय के हित में पेश किया गया था। दोनों पार्टियां पहले ही इस पर सहमत हो चुकी हैं। हालांकि, राज्यपाल ने कुछ सवाल उठाए हैं और विधेयक को आगे स्पष्टीकरण के लिए वापस भेज दिया है।

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बेंगलूरु. राज्यपाल थावर चंद गहलोत ने खनिज कर विधेयक लौटा दिया है। खबरों के अनुसार राज्यपाल ने खनन संघों द्वारा उठाए गए सवालों को अपने फैसले का कारण बताया।

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता बीएल शंकर ने कहा, यह विधेयक समुदाय के हित में पेश किया गया था। दोनों पार्टियां पहले ही इस पर सहमत हो चुकी हैं। हालांकि, राज्यपाल ने कुछ सवाल उठाए हैं और विधेयक को आगे स्पष्टीकरण के लिए वापस भेज दिया है।

दिसंबर 2024 में कैबिनेट द्वारा पारित विधेयक में विभिन्न खनिजों के लिए 20 से 100 रुपए प्रति टन तक कर लगाने का प्रावधान प्रस्तावित है। प्रस्तावित कर प्रति टन बॉक्साइट, लैटेराइट, मैंगनीज और लौह अयस्क खनिज युक्त भूमि के लिए 100, तांबे के अयस्क के लिए 50, चूना पत्थर के लिए 20, सोने के उपोत्पादों के लिए 50 और अन्य सभी अनिर्दिष्ट खनिजों के लिए 40 रुपए है।

इस कर प्रावधान से 4,207.95 करोड़ रुपए राजस्व उत्पन्न होने का अनुमान है, साथ ही सालाना भूमि-युक्त खनिजों पर कर लगाने से 505.9 करोड़ रुपए अतिरिक्त मिलने की उम्मीद है।

लोकसभा के पूर्व सदस्य कांग्रेस के वीएस उग्रप्पा ने कहा, पारंपरिक रूप से बिल पारित होने से पहले एक परंपरा से गुजरते हैं। आमतौर पर उन पर पार्टी के भीतर या विधायिका में चर्चा की जाती है। इस मामले में वह परंपरा गायब लगती है।

विधायिका द्वारा पारित किसी भी विधेयक पर दोनों सदनों में चर्चा होती है। अगर ऐसा कोई विधेयक दोनों सदनों में बहुमत या सर्वसम्मति से पारित हो जाता है तो यह स्पष्ट है कि यह विधेयक संविधान के प्रावधानों के अनुरूप है। ऐसे विधेयक आमतौर पर सरकार द्वारा राज्य के हित में लाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले 11 विधेयक लौटाए जा चुके हैं, जिससे राज्य के विकास में बाधा आ सकती है।