
बेंगलूरु. तमाम विवादों के बीच प्रदेश सरकार व स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम (यूएचएस) के लिए इसके करीब ६ करोड़ लाभार्थियों को अलग से यूएचएस कार्ड जारी करने का विवादित निर्णय वापस ले लिया है। इसके साथ ही कार्ड के लिए जारी निविदा की आवश्यकता भी समाप्त हो गई है।
एक दिन पहले तक अपने इसी निर्णय को सही, जरूरी और जनहितैषी बताने वाली सरकार और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की प्रधान सचिव डॉ. शालिनी रजनीश ने मंगलवार को निर्णय वापस लेने एवं प्रस्तावित यूएचएस कार्ड की जगह आधार कार्ड इस्तेमाल करने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि यूएचएस कार्ड व इसके लिए निविदा जारी करने के बाद से ही इसकी आवश्यकता और निविदा पर होने वाले खर्च को लेकर अनावश्यक विवाद की स्थिति बनी हुई थी। इसलिए सरकार ने यूएचएस कार्ड जारी करने के निर्णय को वापस लिया और इसकी जगह आधार कार्ड उपयोग करने की बात मानी।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है, उन्हें आधार कार्ड बनवाना होगा। स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस काम में लोगों की मदद करेंगे। उन्होंने कहा, आधार कार्ड को कभी नजरअंदाज नहीं किया गया। आधार के साथ दिक्कत थी कि इसे भौतिक रूप से संग्रहित करना पड़ता और व्यक्तिगत इजाजत लेनी पड़ती। इसके अलावा खाद्य और नागरिक आपूर्ति विभाग के पास प्रदेश के करीब दो करोड़ लोगों की जानकारी ही नहीं है।
उन्होंने कहा कि नए कार्ड जारी करने पर ४०० करोड़ रुपए के खर्च का आरोप गलत है। अलग से कार्ड जारी भी करना हो तो लाभार्थी को प्रति कार्ड २० से ३० रुपए का भुगतान करना पड़ता। सरकार कार्ड पर खर्च नहीं कर सकती है। स्वास्थ्य विभाग का इस राशि से कोई सरोकार नहीं है। कार्ड जारी करने वाली एजेंसी राशि लेती है।
शेट्टर ने बताया गैरजरूरी
विधानसभा में विपक्ष के नेता जगदीश शेट्टर ने भी अलग से यूएचएस कार्ड बनाने की योजना को अनावश्यक करार दिया। उन्होंने कहा कि कार्ड पर सरकार न्यूनतम ४०० करोड़ रुपए खर्च करेगी। यूएचएस कार्ड के लिए सरकार लोगों से जो जानकारी लेगी वो आधार कार्ड की जानकारियों से अलग नहीं है लिहाजा पूरी कवायद अनावश्यक है। अलग कार्ड की तभी जरूरत पड़ती जब यूनिवर्सल हेल्थ स्कीम किसी विशेष वर्ग के लिए होती।
Published on:
04 Oct 2017 11:06 pm
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