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जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व-साध्वी डॉ.कुमुदलता

महामंगलकारी अनुष्ठान आज

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जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व-साध्वी डॉ.कुमुदलता

जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व-साध्वी डॉ.कुमुदलता

बेंगलूरु. पाश्र्व सुशीलधाम में विराजित साध्वी डॉ. कुमुदलता ने शुक्रवार को आयोजित धर्मसभा में कहा कि अहिंसा का सामान्य अर्थ है हिंसा न करना और इसका व्यापक अर्थ है-किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुंचाना। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी द्वारा भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था में, किसी भी प्राणी की हिंसा न करना यह अहिंसा है। जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी ने भारत की आजादी के लिए जो आंदोलन चलाया वह काफी सीमा तक अहिंसात्मक था। साध्वी ने कहा कि कोई वस्तु जैसी देखी गई हो तथा जैसी अनुमति हो उसका उसी रूप में वचन द्वारा प्रकट करना तथा मन के द्वारा संकल्प करना सत्य कहलाता है, परंतु यह वाणी भी सब भूतों के उपकार के लिए प्रवृत्त होती है। इस प्रकार सत्य की भी कसौटी अहिंसा ही है। एक ही जीव जो एक जन्म में अन्न होता है, दूसरे जन्म में स्थावर हो सकता है। सब जीवों को दुख अप्रिय होता है। यह समझ कर मुमुक्षु सब जीवों के प्रति अहिंसा भाव रखें। सब जीव जीना चाहते हैं, मरना कोई नहीं चाहता। जो व्यक्ति हरी वनस्पति का छेदन करता है वह अपनी आत्मा को दंड देने वाला है। वह दूसरे प्राणियों का हनन करके परमार्थ अपनी आत्मा का ही हनन करता है। ये जो वह राग-द्वेष की प्रवृति करता है वह अपनी आत्मा का ही घात करता है। फिर चाहे दूसरे जीवों का घात करे या न करे। हिंसा से विरत न होना भी हिंसा है और हिंसा में परिणत होना भी हिंसा है। इसलिए जहां राग द्वेष की प्रवृत्ति है वहां निरंतर प्राणवध होता है। जैन धर्म में सब जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार अहिंसा है। भगवान महावीर ने दुनिया को कई उपदेश बहुत ही अच्छे दिए। उनका सबसे प्रिय संदेश था अहिंसा के मार्ग पर चलने का। जितने उपदेश उन्होंने इस दुनिया को दिए, मुझे नहीं लगता कि दुनियावासी उनका अनुसरण कर रहे हैं। आज के युग में जहां चारों ओर चोरी-डकैती,मारधाड़, लूटपाट आतंकवाद फैला हुआ है। ऐसे देश में आप कितनी ही बड़ी-बड़ी बातें करे। ये सब बेमानी लगती हैं। क्योंकि आज हर मनुष्य की चाहत पैसा,ऐशोआराम की चीजें और जल्द से जल्द अमीर बनने की चाहत ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया है। आज हम इस बात का भरोसा नहीं कर सकते हैं कि इस समय हम कितने सुरक्षित हैं। हर पल हर समय यही बात दिखाई देती है कि क्या पता किस समय कौन आपके सामने आ जाए और आप जिंदा भी रहें या नहीं। साध्वी वृन्द ने आने वाले नव वर्ष की शुभकामनाए देते हुए गुरु भक्तों को स्वस्थ रहो मस्त रहो और 2021 पूर्ण हो रहा है तो सबका कार्य भी 21 हो का आशीर्वाद दिया। शनिवार को सुबह १०:१५ बजे साध्वी डॉ. कुमुदलता आदि ठाणा की निश्रा में सुसवाणी माता मंदिर में महामंगलकारी अनुष्ठान का आयोजन होगा।