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संत खेतेश्वर मंदिर की जलकलश यात्रा में उमड़ा जन समूह

राजपुरोहित संघ द्वारा नवनिर्मित संत खेतेश्वर मंदिर एवं खेतेश्वर भवन के प्रतिष्ठा समारोह जलकलश यात्रा निकाली गई

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kheteshwar

बेंगलूरु. चढ़ावों के लाभार्थी परिवार व कन्याएं प्रात: 6 बजे से ही खेतेश्वर भवन में एकत्रित हो गई। पारंपरिक वेशभूषा में कलश धारण किए सैंकड़ो कन्याओं व मंगलगीत गाती महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा। धर्मगुरु संत तुलछाराम महाराज, बह्मधाम आजोगा, नारायण गिरि महाराज गाजियाबाद संत निर्मलदास महाराज, संत कबीर आश्रम बालोतरा एवं अन्य साधु संतों को शोभायात्रा में सजाए गए विशेष रथों में विराजमान
किया गया।
खेतेश्वर भवन तुलसीतोटा से जलकलश यात्रा को रवाना किया गया। एक के पीछे एक पंद्रह रथों पर सवार गुरुवृंद व आगे कतारबद्ध सैकड़ों कन्याआएं कलश धारण किए व महिलाओं का हुजूम देखते ही बन पड़ रहा था। यात्रा कॉटनपेट मैन रोड होते हुए अक्कीपेट बाबा राम देव के मंदिर अक्कीपेट मैन रोडसे पुन: खेतेश्वर भवन पहुंच संपन्न हुई। दिनभर हवन, पूजा पूजन के विभिन्न कार्यक्रमों के साथ ही पैलेस ग्राउंड स्थित ओम शृंगार में रात्रि जागरण भजन संध्या का आयोजन हुआ। भजन संध्या के दौरान विभिन्न चढ़ावे लाभार्थियों का बहुमान संघ द्वारा किया गया।

संत खेतेश्वर प्रतिमा स्थापना कल
प्रतिष्ठा महोत्सव के तीसरे दिन 17 फरवरी को प्रात: संत खेतेश्वर की प्रतिमा प्रतिष्ठापित की जाएगी व मंदिर का कायमी ध्वजारोहण लाभार्थी परिवारों द्वारा किया जाएगा। समारोह में बेंगलूरु मध्य सांसद पीसी मोहन, महाराष्ट्र के केबिनेट मंत्री राज के पुरोहित, मेजर जनरल नरपतसिंह राजपुरोहित, आहोर विधायक शंकरसिंह राजपुरोहित, प्रदेश कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव, एमएलसी लहरसिंह सिरोया, आईपीएस सुरेश कुमार राजपुरोहित, आईपीएस एमएल अनुचेत, कॉटनपेट पार्षद डी प्रेमाद कुमार, चिकपेट पार्षद लीला शिवकुमार, गांधीनगर पार्षद आरजे लता राठौड़ व एसीपी वेस्ट निरंजन राज अर्ष व अन्य गणमान्यज उपस्थित रहेंगे।

जिनालय प्रतिष्ठा समारोह में मना जन्मकल्याणक
बीरूर. आचार्य चंद्रयश सूरीश्वर एवं प्रवर्तक कलापूर्ण विजय की निश्रा में चल रहे विमलनाथ नवग्रह सुवर्ण जिनालय के प्रतिष्ठा समारोह में गुरुवार को विमलनाथ जन्म कल्यााणक उत्सव मनाया गया। जन्मकल्याणक पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने एक दूसरे को बधाई दी एवं ïश्यामा देवी के घर नंद भयो जय बोलो विमलनाथ की आदि जयकारे लगाए। जन्मकल्याणक की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए आचार्य ने कहा कि परमात्मा का जब धरती पर अवतरण होता है तब तीनों लोकों में आनंद ही आनंद का वातावरण होता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा का जन्म और जीवन दोनों ही आनंदकारी है। उनके जन्म से सबको सुख की प्राप्ति होती है। जब मानव में परमार्थ भाव आए तब समझें कि वह मानव है। मानव की पहचान ही मानवता है लेकिन आज के दौर में अधिकांश मनुष्यों में मानवता दिखाई नहीं देती। इसलिए प्रभु के जन्म कल्याणक उत्सव पर नियम करें कि स्वार्थ का त्याग कर परमार्थ के पथ पर चलेंगे। डॉ. शिवमूर्ति शिवाचार्य महास्वामी ने कहा कि जिनालय का निर्माण अपने आप में अनोखा है। उन्होंने कहा कि आचार्य के कार्यों की मैं सराहना करता हूं और अनुमोदना करता हूं। जन्मकल्याणक पर 56 दिगुकुमारी ने चामर, पंखा, कलश आदि विविध वस्तुओं से जन्मोत्सव मनाया और सूतिकर्त किए। मेरू पर्वत पर परमात्मा विमलनाथ के 250 अभिषेक मंत्रोच्चार पूर्वक संपन्न हुए।