
मंदिरों में की पूजा-अर्चना, गुरुओं के चरण वंदन कर लिया आशीर्वाद,मंदिरों में की पूजा-अर्चना, गुरुओं के चरण वंदन कर लिया आशीर्वाद,गुरु हमारे जीवन निर्माता-साध्वी डॉ.सुप्रभा
बेंगलूरु. जय ब्रज मधुकर अर्चना चातुर्मास समिति गणेशबाग के तत्वावधान में चातुर्मास के लिए विराजित साध्वी डॉ. सुप्रभा ‘सुधा’ ने बुधवार को गुरुपूर्णिमा पर धर्मसभा में कहा कि चातुर्मास आत्म जागृति का पावन अवसर है। चातुर्मास के 4 महीने तक धर्मगुरु हमें धर्म से जोडक़र जिनवाणी का अमृत पान कराते हैं। उन्होंने कहा कि व्यक्ति जितना चातुर्मास में जुड़ा रहेगा वह उतना ही सांसारिक पापकारी क्रियाओं से निवृत्त होता रहेगा। उन्होंने कहा कि हमें यह मानव जीवन अनंत पुण्यवानी से मिला है। इस मानव देह को प्राप्त करने के लिए स्वर्ग के देवता भी तरसते हैं। क्योंकि मनुष्य गति ही एक ऐसी गति है जहां व्यक्ति धर्म आराधना व्रत नियम अंगीकार कर सभी कर्मों से मुक्त होकर परम पद मुक्ति को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने गुरु पूर्णिमा पर्व पर सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि गुरु हमारे जीवन निर्माता हैं। गुरु की साधना के बिना जीवन की आराधना अधूरी है। अपने जीवन में जो भी हमारे उपकारी गुरु हैं उनका सदैव आदर सम्मान सत्कार करें गुरु की शिक्षाओं को अपने जीवन में आत्मसात करें एवं सदैव गुरु का आशीर्वाद प्राप्त करें यही गुरुपूर्णिमा पर्व का पावन संदेश है। साध्वी डॉ. हेमप्रभा ‘हिमांशु’ ने कहा कि चातुर्मास तप त्याग का स्वर्णिम अवसर है। चातुर्मास घर पर आई हुई साक्षात गंगा है। यह चातुर्मास हमें कषायों को शांत करने का उपदेश देने आए हैं। जैसे सांसारिक कार्यों में सफलता के लिए मानव गणेश को स्मरण करता है वैसे ही हम आज इन चातुर्मास के अध्यात्म काल में सफल सफलता के लिए गणधर गौतमस्वामी का आह्वान करते हैं। उन्होंने एक भजन के माध्यम से गणधर गौतमस्वामी को प्रार्थना के शब्दों से स्मरण किया। उन्होंने चातुर्मास शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि चातुर्मास का च शब्द हमें चातुर्मास में अपनी चंचलता को छोडऩे की प्रेरणा करता है। र शब्द अपने आत्मा में ज्ञान दर्शन चरित्र की अभिवृद्धि हो इसकी प्रेरणा करता है। त शब्द तपस्या के द्वारा अपने कर्मों की निर्जरा करने का एवं आत्म शुद्धि का प्रेरणा देता है। मा शब्द साधक को आत्मा में रमण करने की प्रेरणा करता है। हम विभाव से संभव में आएं राग से विराग की ओर बढ़े और पर से स्व में आए उद्यम करें एवं अपनी रसना इंद्रिय पर स्वाद पर विजय प्राप्त करें आलस्य प्रमाद का त्याग करें समय का सदुपयोग करें और मिथ्यात्व रूपी अज्ञान अंधकार से दूर हट कर अपनी आत्मा में ज्ञान की ज्योति प्रज्वलित करें यही चातुर्मास हमें प्रेरणा करने आते हैं। साध्वी मंडल की जिनवाणी सुनने के लिए श्रद्धालुओं का अपार जनसैलाब आज गणेशबाग जैन स्थानक में उमड़ पड़ा। राज्यसभा सांसद लहरसिंह सिरोया ने अपने विचार व्यक्त किए। संचालन जयब्रज मधुकर अर्चना चातुर्मास समिति गणेशबाग के महामंत्री मनोहरलाल लुकड़ ने किया।
Published on:
14 Jul 2022 07:50 am
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