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तंजावुर में तैनात होगा सुखोई का नया स्क्वाड्रन

फ्लाइंग डैगर्स के बाद दक्षिण में वायुसेना का दूसरा स्क्वाड्रनहिंद महासागर और दक्षिणी प्रायद्वीप में बढ़ेगी ताकत

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तंजावुर में तैनात होगा सुखोई का नया स्क्वाड्रन

तंजावुर में तैनात होगा सुखोई का नया स्क्वाड्रन

बेंगलूरु.
अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई-30 का नया स्क्वाड्रन तमिलनाडु के तंजावुर वायुसैनिक अड्डे पर तैनात होगा। वायुसेना ने वर्ष 2011 में निष्क्रीय किए गए 'नंबर-222 स्क्वाड्रन-टाइगर शाकर््सÓ को फिर एक बार ऑपरेशनल करते हुए सुखोई के इस नए स्क्वाड्रन को यही नाम दिया है। दक्षिण भारत में तैनात किया जाने वाला वायुसेना का यह दूसरा स्क्वाड्रन होगा। इससे पहले कोयम्बटूर के सुलूर हवाई अड्डे पर नंबर-45 फ्लाइंग डैगर्स स्क्वाड्रन की तैनाती गई है। इस नाम से हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) तेजस का परिचालन होता है।
सैन्य सूत्रों के मुताबिक जनवरी के दूसरे सप्ताह में नए सुखोई विमानों को वायुसेना के बेड़े में औपचारिक रूप से शामिल किया जाएगा। इस कदम से हिंद महासागर में भारतीय वायुसेना को एक नई ताकत मिलेगी। वायुसेना ने हाल ही में घोषणा की थी कि नंबर 222 स्क्वाड्रन 'द टाइगर शाक्र्सÓ अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआइ मल्टीरोल लड़ाकू विमान के साथ फिर से जीवित हो गई है। सुखोई-7 के साथ 15 सितंबर 1969 को इस स्क्वाड्रन का गठन हुआ था। बाद में इस स्क्वाड्रन को मिग-27 ग्राउंड अटैक युद्धकों से सुसज्जित किया गया। इन विमानों को 2011 में रिटायर कर दिया गया था और टाइगर शाक्र्स को निष्क्रीय कर दिया गया। लेकिन, अब फिर एक बार उसे ऑपरेशनल किया गया है।
तंजावुर वायुसैनिक अड्डे का परिचालन दक्षिण वायुकमान के अंतर्गत होता है। यह वायुसैनिक अड्डा 27 मई 2013 को राष्ट्र के नाम किया गया। यह दक्षिणी प्रायद्वीप और हिंद महासागर में विभिन्न रणनीतिक और आर्थिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा के लिए अनिवार्य था। पिछले छह वर्षों के दौरान इस हवाई अड्डे से सुखोई-30 का परिचालन होता रहा है। सुखोई-30 एमकेआइ विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ हैं और इसे भारत के अहम रक्षा साझीदार रूस ने विकसित किया है। भारत ने रूस के सुखोई-30 विमान में अपनी जरूरतों के अनुसार बदलाव करवाए और नया नाम मिला- सुखोई 30 एमकेआइ। लाइसेंस हस्तांतरण द्वारा भारत में इन युद्धक विमानों का उत्पादन हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) करती है और इसके कलपुर्जे रूस से भारत खरीदता है।
सुखोई-30 एमकेआइ चौथी पीढ़ी के सबसे उन्नत और कलाबाजियां करने में माहिर विमानों में से एक है। यह एक मल्टीरोल लड़ाकू है जिसका अर्थ है कि यह जमीनी हमले, डॉग फाइट, समुद्री हमले जैसे कई तरह के मिशनों को अंजाम देने में सक्षम है। भारत ने सुखोई-30 एमकेआइ को दुनिया की सबसे घातक मिसाइलों में से एक ब्रह्मोस से लैस कर दिया है। अब यह युद्धक अपने आप में एक अलग किस्म का हथियार बन चुका है। जब सुखोई-30 से ब्रह्मोस मिसाइल का परीक्षण हो रहा था तब भी तंजावुर वायुसैनिक अड्डे ने काफी अहम भूमिका अदा की थी। तंजावुर में ब्रह्मोस से लैस सुखोई-30 की तैनाती के बाद न सिर्फ वायुसेना की हवाई ताकत बढ़ेगी बल्कि सागर या जमीन पर किसी भी मौसम में 24 घंटे दुश्मनों के ठिकानों को नेस्तानाबूद करने के लिए भारत तैयार होगा।