
बेंगलूरु. राजाजीनगर के सलोत जैन आराधना भवन में आचार्य देवेंद्रसागर सूरी ने प्रवचन में कहा कि जीवन में सत्कर्म, सद्व्यवहार तथा सद्आदर्श ही सर्वोपरि है। व्यक्ति की तीन तस्वीरें हैं- लोग उसे किस रूप में समझते हैं। वह किस रूप में जीता है। वह किस रूप में अपने आपको प्रस्तुत करता है। इनको समन्वित रूप से अपनाने में मानव जीवन की सभी समस्याओं का एक साथ समाधान हो जाता है।
प्राय: सभी का मन अत्यंत चंचल होता है। धर्मभूमि कुरुक्षेत्र में अर्जुन ने कृष्ण से भी यही समस्या कही थी कि हे कृष्ण, यह मन बड़ा ही चंचल है, यह बड़ा बलवान और असंतुलित स्वभाव वाला है। महारथी अर्जुन के इस सवाल को सुनकर भगवान कृष्ण ने कहा कि इस मन की चंचलता को केवल अभ्यास और वैराग्य से ही बड़ी आसानी से वश में किया जा सकता है।
उन्होंनें कहा कि आपके जीवन की खुशी आपके विचारों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। यही कारण है कि मानव व्यक्तित्व का एक मजबूत आधार है उसके विचार। मानव जीवन के दु:ख-सुख एवं उत्थान-पतन का केंद्र बिंदु उसके विचार ही होते हैं। आदर्शवादी उच्च स्तर का चिंतन करने वाले चरित्रवान एवं सेवाभावी लोग अपनी विचार-तरंगों के माध्यम से समस्त विश्व को अपनी प्रखर प्रेरणाओं से लाभान्वित करते हैं। अत: सदा पवित्र विचार रखें और दूसरों का भला सोचें।
Published on:
05 Oct 2020 05:23 pm
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