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बगुला भक्तों को नहीं मिल सकता भगवान

व्यक्ति को हंस के गुणों को धारण करना चाहिए, जो बाहर से सफेद दिखता है और दिल से भी सफेद होता है

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बगुला भक्तों को नहीं मिल सकता भगवान

बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जयपरिसर महावीर धर्मशाला में जयधुरंधर मुनि ने चातुर्मास प्रवचन के दौरान कहा कि बगुला की श्रेणी में आने वाले भक्त को भगवान नहीं मिल सकता। मनुष्य की विविध श्रेणियों को बताते हुए उन्होंने कहा कि व्यक्ति को हंस के गुणों को धारण करना चाहिए, जो बाहर से सफेद दिखता है और दिल से भी सफेद होता है।

कथनी और करनी में फर्क नहीं होता। यही मनुष्य की श्रेष्ठ श्रेणी है। दूसरी श्रेणी में वह व्यक्ति आता है, जिसकी वाणी और लक्ष्य दोनों ही कठोर होते हैं। जैसे कौआ, बाहर भी काला और अंदर भी काला। ऐसे व्यक्ति निम्न श्रेणी में आते हैं, यह आत्मा के निजगुण के विरुद्ध है। तीसरी श्रेणी का व्यक्ति बाहर से सज्जन, मगर दिल से काला होता है, जैसे बगुला ध्यानस्थ मुद्रा में रहता है, किंतु नजर मछली पर होती है। यह मनुष्य की निम्मतम श्रेणी है, जो अत्यंत अहितकर है। मनुष्य को सिद्धाचल प्राप्त करना है तो सीधा चलना होगा। सरलता अपनानी होगी। यही गुण मित्रता बढ़ाते हैं।

सोलह दिन तप, जप एवं धार्मिक अनुष्ठानों द्वारा साधना करने वाली 100 से अधिक महिलाओं का संघ की ओर से सम्मान किया गया। शांतिलाल सियाल के 8 उपवास की अनुमोदना आशा बाई श्रीश्रीमाल ने तप द्वारा की। संघ ने उनका सम्मान किया। नंदिनी बाई एवं संतोष बाई बोहरा ने उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।


कर्मों से मुक्ति में है सच्ची आजादी
बेंगलूरु. वीवीपुरम स्थित सीमंधर शांति सूरी जैन ट्रस्ट की ओर से आयोजित धर्मसभा में आचार्य चन्द्रभूषण सूरीध्वर ने कहा कि पूरे देश में आजादी के नगाड़े बज रहे हैं, परंतु आजादी नजर नहीं आ रही है। आज हर मनुष्य गुलाम बनकर जी रहा है। मनुष्य अपने स्टेटस का गुलाम बना हुआ है। बालक को टीवी की गुलामी है। युवक व्यसन का गुलाम है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाए तो आत्मा कर्मों की गुलाम बनी हुई है। सच्ची आजादी कर्मों से मुक्त होने पर प्राप्त होती है।

पुरुषार्थ के लिए मिला है जीवन
नाकोड़ा पार्श्वनाथ जैन श्वेताम्बर मंदिर, राजाजीरनगर के लुनिया भवन में आयोजित प्रवचन में मंगलवार को अभिनंदनचन्द्र सागर ने कहा कि मनुष्य जन्म हमें आत्मा से परमात्मा बनाने के लिए मिला है। यह जीवन केवल खाने-पीने के लिए नहीं मिला है। जीवन सफल बनाने के लिए अपना ध्येय निर्धारित करना होगा।