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होयसला मंदिर: यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में कर्नाटक का नाम

कला और संस्कृति से दुनिया को आकर्षित करेंगे होयसला के मंदिर

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होयसला मंदिर: यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में कर्नाटक का नाम

कर्नाटक स्थित होयसला मंदिर

बेंगलूरु: देशभर में आज हर तरफ गणपति की गुंज है। लोग धूमधाम से गणेश उत्सव का जश्न मना रहे हैं। लेकिन कर्नाटक में आज एक साथ दो जश्न मनाए जा रहे हैं। कर्नाटक के होयसला मंदिर के पवित्र समूह को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। इससे पूरे राज्य में हर्ष का माहौल है। यह घोषणा सऊदी अरब के रियाद में की गई। जहां विश्व धरोहर समिति का 45वां सत्र आयोजित किया जा रहा है। भारत ने जनवरी 2022 में विश्व धरोहर केंद्र को होयसला के पवित्र समूह के लिए नामांकन दस्तावेज जमा किए थे।
इस सूची में कर्नाटक के तीन मंदिरों-बेलूर में चन्नकेशव मंदिर, हासन जिले के हलेबिदु में होयसलेश्वर मंदिर और केसव मंदिर-को शामिल किया गया है। यह मंदिर 12वीं-13वीं शताब्दी में बनाए गए थे। जो कला एवं साहित्य के संरक्षक माने जाने वाले होयसला राजवंश की राजधानी थी।
इस पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रतिक्रिया व्यक्त की और कहा कि "होयसला मंदिरों की कालातीत सुंदरता और जटिल विवरण भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और हमारे पूर्वजों की असाधारण शिल्प कौशल के प्रमाण हैं।"

होयसला का इतिहास और महत्व
12वीं और 13वीं शताब्दी के दौरान होयसला के पवित्र समूहों का निर्माण किया गया। जिनका प्रतिनिधित्व बेलूर, हलेबिड और सोमनाथपुरा के तीन घटकों द्वारा किया जाता था। होयसला मंदिर मध्य भारत में प्रचलित भूमिजा शैली, उत्तरी और पश्चिमी भारत की नागर परंपराओं और कल्याणी चालुक्यों द्वारा समर्थित कर्नाटक द्रविड़ शैलियों से पर्याप्त प्रभाव को प्रदर्शित करती हैं।
होयसला एक शक्तिशाली राजवंश था। जिसने 11वीं से 14वीं शताब्दी तक दक्षिणी भारत के अधिकांश भाग पर शासन किया। होयसला राजा कला के संरक्षण के लिए जाने जाते थे। उन्होंने अपने शासनकाल के दौरान कई मंदिरों और अन्य धार्मिक संरचनाओं का निर्माण किया। होयसला के पवित्र समूह होयसला वास्तुकला के सबसे प्रभावशाली उदाहरण हैं।

होयसला के महत्वपूर्ण पवित्र समूह

होयसला मंदिरों की मुख्य विशेषताएं