
मनुष्य जन्म मिलन बहुत दुर्लभ
बेंगलूरु. हलसूर जैन स्थानक में विराजित साध्वी प्रतिभाश्री ने कहा कि मनुष्य जन्म मिला बहुत दुर्लभ है। मनुष्य जन्म के साथ 4 अंगों का मिलना अत्यंत दुर्लभ है। भगवान महावीर स्वामी ने उत्तराध्ययन सूत्र में बताया कि संसार में प्राणी के लिए मनुष्य जन्म, धर्मशास्त्र का श्रवण, धर्म पर श्रद्धा और संयम में पराक्रम आत्मशक्ति लगाना इन चार प्रधान अंगों की प्राप्ति होना दुर्लभ है। हमें हमारी पूर्व की पुनवानी से मनुष्य जन्म तो मिल गया। हम मानव तो बने लेकिन हमारे जीवन में अभी तक मानवता नहीं आई है, क्योंकि ऐसे कई व्यक्ति हैं जो जीव हिंसा करते हैं, तो कई पुण्य का कार्य भी करते हैं। धर्म भी करते हैं और धर्म का आचरण भी करते हैं। हर कोई मनुष्य एक जैसे नहीं होते हैं। हमारी बड़ी पुण्यवानी से हमें साधु संतों का समागम प्राप्त हुआ और मनुष्य जन्म के साथ धर्म श्रमण भी मिल गया। क्योंकि साधु संत भगवान की जिनवाणी फरमाते हैं और भवी आत्मा उस जिनवाणी को अपने हृदय में धारण करता है। धर्म श्रमण पाकर भी उस पर रुचि श्रद्धा होना अत्यंत दुर्लभ है, क्योंकि न्याय संगत सम्यक दर्शनादि रूप मोक्ष मार्ग सुनकर भी बहुत से मनुष्य उससे भ्रष्ट हो जाते हैं। मनुष्य जन्म और धर्म श्रवण और धर्म श्रद्धा पाकर भी संयम में पराक्रम करना शक्ति लगाना और भी दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि श्रद्धा वही व्यक्ति कर सकता है जिसेे अपने आप में विश्वास होता है। अगर जिसको अपने धर्म पर विश्वास नहीं वह किसी पर भी विश्वास नहीं कर सकता है। आज की दुनिया श्रद्धा और विश्वास और आस्था पर ही टिकी हुई है। अगर विश्वास नहीं हो तो यह संसार नहीं चल सकता। साध्वी प्रतिभाश्री के सान्निध्य में गौतमचंद, अशोक कुमार, निर्मल कुमार बाफना, देवीचंद, अशोककुमार बोहरा, रिषभ भिलवाडिय़ा के यहां नवकार महामंत्र का जाप रखा गया था।
Published on:
19 Nov 2019 05:35 pm
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