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मानव का जीवन एक संघर्ष है-छत्रांगमुनि

प्रथम विहार में राजाजीनगर पहुंचे

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मानव का जीवन एक संघर्ष है-छत्रांगमुनि

मानव का जीवन एक संघर्ष है-छत्रांगमुनि

बेंगलूरु. श्रीरामपुरम स्थानक में चातुर्मास सम्पन्न कर अपने प्रथम विहार में छत्रांगमुनि आदि ठाणा राजाजीनगर स्थानक पहुंचे। यहां धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मानव का जीवन एक संघर्ष है। यह जीवन सुख-दु:ख का चक्र है। इस जीवन में संघर्ष के अनेक तूफान आते जाते है। हमें उन तूफानों से विचलित ना होकर धैर्य से उनका सामना करना चाहिए। इसीलिए परमात्मा ने प्रतिकूलता में जीने के लिए कहा है। अनुकूलताओं में तो सभी लोग जी लेते हैं, लेकिन जो प्रतिकूलताओं में जीना जानते हैं। वह ही सही जीवन जीते हैं। व्यक्ति को प्रतिकूलता में भी प्रसन्नचित्त होकर कार्य करना चाहिए। यह सबसे ऊंची तपस्या है। यह सबसे ऊंची साधना है। प्रतिकूल समय को अपने साहस के बल पर गति देने से ही जीवन में सफलता मिलती है। जीवन में अगर संघर्ष न हों, चुनौतियां न हों तो मनुष्य के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास नहीं हो पाता। एक बीज भी बिना संघर्ष के पौधा या पेड़ नहीं बन सकता। संघर्ष हमें जीवन का अनुभव कराते हैं, सतत सक्रिय बनाते हैं, और हमें जीना सिखाते हैं। हर किसी व्यक्ति को अपने जीवन में अपनी मंजिल व लक्ष्य पाने के लिए संघर्ष का सहारा लेना ही पड़ता है। संघर्षमय जीवन में जागरूक होकर जो व्यक्ति परमात्मा का अनुसरण करता है वह अपने जीवन को सार्थक करता है।
निर्वाणमुनि ने कहा कि महावीर ने हमें अहिंसा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया है। संसार में कोई भी व्यक्ति तब तक सुखी नहीं हो सकता जब तक उसको किसी भी चीज की आकुलता है और आकुलता तब तक नष्ट नहीं हो सकती, जब तक उसके पास कुछ भी परिग्रह है। इस संसार में माया व मोह ही दुख का कारण है। प्राणी मात्र को चाहिए कि वह माया के बंधंन से मुक्त होने की कोशिश करे। इसलिए परम सुखी होने के लिए त्याग की आवश्यकता होती है। मुनि का गुरुवार का प्रवचन सुबह 9.15 बजे से राजाजीनगर स्थानक में ही रहेगा। इस अवसर पर राजाजीनगर संघ के उपाध्यक्ष मदनलाल गांधी, महावीर डोसी, मिश्रीमल कटारिया, महावीर धोका, शांतिलाल चाणोदिया, जंबुकुमार दुग्गड़, नेमीचंद दलाल, प्रकाश चाणोदिया, सुमत सुराणा, किशोर कर्णावत, मिलाप धारीवाल व अन्य तथा अतिथियों में शांतिलाल सांड, धर्मचंद बंबकी, कमल सिपानी, देवीलाल सुखलेचा, शांतिलाल खिवेसरा , सुवालाल दक उपस्थित थे। संचालन नेमीचंद बाबेल ने किया।