
अलग रह रही पत्नी की निम्हांस में जांच कराने की पति की याचिका खारिज
Karnataka High Court ने पारिवारिक अदालत के पिछले आदेश के खिलाफ एक व्यक्ति की याचिका खारिज कर दी है, जिसमें उसने अपनी अलग रह रही पत्नी द्वारा क्रूरता के आधार पर अपनी शादी को रद्द करने और उसे मेडिकल जांच के लिए उसे राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) में भेजने की मांग की थी।
अलग हो चुकी पत्नी ने पहले उस व्यक्ति के खिलाफ Dowry Prevention Act के प्रावधानों सहित कई आरोपों के तहत मामला दर्ज किया था।
जस्टिस एम. नागप्रसन्ना की एकल पीठ ने पति द्वारा अलग रह रही पत्नी को 50,000 रुपए के जुर्माने के साथ याचिका खारिज कर दी।
पति के वकील ने तर्क दिया था कि शादी रद्द कर दी जानी चाहिए क्योंकि विक्टोरिया अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग ने निर्धारित किया था कि महिला की मानसिक आयु 11 साल और आठ महीने थी।
दूसरी ओर, अलग हो चुकी पत्नी के वकील ने तर्क दिया कि याचिका उसकी Mental Status से संबंधित नहीं है बल्कि क्रूरता के आधार पर विवाह रद्द करने से संबंधित है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि महिला एक शिक्षिका, गायिका और पॉलिटेक्निक की छात्रा थी और कई तकनीकी परीक्षाओं में शामिल हुई थी।
पीठ ने कहा, इसका वास्तविक अर्थ यह नहीं होगा कि पहला प्रतिवादी मानसिक रूप से अस्वस्थ है। पत्नी ने यह दिखाने के लिए ढेर सारे दस्तावेज पेश किए हैं कि वह बेहद प्रतिभाशाली है। उन सभी को देखने से स्पष्ट रूप से संकेत मिलेगा कि पति संबंधित अदालत के समक्ष शादी को रद्द करने की मांग के लिए अपने पक्ष में एक मंच तैयार करने की कोशिश कर रहा है।
इस तरह की दलीलों को केवल इसलिए खारिज कर दिया जाता है क्योंकि पति ने पत्नी की मानसिक अस्वस्थता का हवाला देते हुए संबंधित अदालत के समक्ष याचिका दायर नहीं की है, बल्कि यह क्रूरता पर है।
Published on:
21 Mar 2024 10:19 am

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