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Ganesh chaturthi 2022: कोविड का ‘विघ्न’ नहीं, भव्यता से विराजेंगे ‘गजानन’ मगर इस कारण महंगी होंगी मूर्तियां …

मूर्तियों पर मौसम की मार, कारीगर विघ्न विनाशक से कर रहे गुहार

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Ganeshji Ki Sabse Achchi Murti Ganesh Chaturthi 2021 Ganesh Murti

Ganeshji Ki Sabse Achchi Murti Ganesh Chaturthi 2021 Ganesh Murti

बेंगलूरु. पिछले दो साल से कोरोना के नियमों की मार झेल रहे विघ्न विनाशक की मूर्ति बनाने वाले कारीगरों को इस वर्ष राज्य सरकार ने राहत तो दी है। लेकिन, लगातार बरसात का मौसम उनकी उम्मीदों पर पानी फेरने पर आमादा है। बेंगलूरु में लगभग रोज बरस रहे बादलों ने जहां मिट्टी की उपलब्धता कम कर दी वहीं मूर्तियों को सूखने में भी ज्यादा समय लग रहा है। अब जबकि गणेश चतुर्थी ganesh chaturthi में महज नौ दिन रह गए हैं, ऐसे में मूर्ति बनाकर गुजर-बसर करने वाले कारीगर विघ्न विनाशक से ही मौसम की मेहरबानी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।

मौसम की मार : मिट्टी की कमी, सूख नहीं रहीं मूर्तियां
मौसम में लगातार नमी के कारण कारीगर इस वर्ष मिट्टी की मूर्तियों की कीमत में लगभग डेढ़ गुना इजाफा करने को मजबूर हैं।

मिट्टी की कमी का कारण बताते हुए एक कारीगर ने कहा कि लगातार बारिश ने शहर की झीलों को लबालब कर दिया था, जिससे मूर्ति बनाने में इस्तेमाल होने वाली मिट्टी को निकालना मुश्किल हो गया। इस वजह से मिट्टी की कमी हो गई। हालांकि, कुछ मूर्ति निर्माता गणेश प्रतिमा व अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमा बनाने पर सालभर काम करते हैं। लेकिन, सभी ने गणेश चतुर्थी के लिए मिट्टी का स्टॉक नहीं किया है। पिछले तीस वर्षों से मूर्ति बना रहे मंजप्पा का कहना है कि हम में से कई लोगों ने मिट्टी का स्टॉक कर लिया था। लेकिन, कुछ अन्य लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ा। इसके कारण कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, पॉटरी टाउन के एक कारीगर ने कहा कि शहर का लगातार नम मौसम एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा कि मूर्तियां महीनों से सूख नहीं रही थीं जिसकी वजह से पूरी प्रक्रिया बाधित हो गई। उन्होंने कहा कि दो महीने पहले बनाई गई मूर्तियां अभी तक सूखी नहीं हैं। मूर्तियों को डिजाइन करने के बाद उन्हें सूखने के लिए पर्याप्त धूप मिलनी चाहिए। इसके बाद ही हम इन्हें रंगना और सजाना शुरू कर सकते हैं। लेकिन, अब यह प्रक्रिया रुक गई है क्योंकि मूर्तियां नहीं सूख रही हैं।

पेंट की कीमतों में भारी उछाल
कारीगरों के अनुसार पिछले साल गोल्डन पेंट की कीमत 1,000 रुपए प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर 1,500 रुपए हो गई है। खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि इस साल कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। इसकी वजह यह है कि मूर्ति निर्माताओं ने मूर्तियों के मूल्य में वृद्धि की है। गांधी बाजार के मूर्ति विक्रेता ने कहा कि खुदरा विक्रेताओं को पिछले तीन वर्षों में भारी नुकसान हुआ है। हमारे पास इस साल इसकी भरपाई करने का मौका है। इसके अलावा कोई विकल्प नहीं है। राजाजीनगर के एक अन्य मूर्ति विक्रेता ने कहा कि पिछले साल 100 से ज्यादा मूर्तियां नहीं बिकी थीं। सरकार की ओर से प्रतिबंधों को हटाने जाने से मूर्ति विक्रेता उत्साहित हंै, जो इस साल अच्छा कारोबार करने की उम्मीद कर रहे हैं।

नियमों को लेकर सख्ती
कर्नाटक राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (केएसपीसीबी) ने राज्य भर के स्थानीय निकायों को प्लास्टर ऑफ पेरिस (पीओपी) और रासायनिक रंगों से बनी गणेश और गौरी की मूर्तियों की बिक्री रोकने के निर्देश जारी किए हैं। बेंगलूरु में बीबीएमपी क्षेत्रीय समितियों का गठन करेगा, जिसमें क्षेत्रीय संयुक्त आयुक्त, केएसपीसीबी क्षेत्रीय अधिकारी, पुलिस विभाग के एक अधिकारी और एक गैर सरकारी संगठन के एक प्रतिनिधि शामिल होंगे जो नियमों का उल्लंघन करने वालों पर नजर रखेंगे।