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क्रोध को शांत कर लिया तो घर स्वर्ग बन जाएगा: साध्वी डॉ प्रतिभाश्री

अक्कीपेट में प्रवचन

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बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, अक्कीपेट के तत्वावधान में अक्कीपेट स्थानक में विराजित साध्वी डॉ प्रतिभाश्री ने प्रवचन में कहा कि मानव चाहे तो दानव भी बन सकता है और देव भी बन सकता है। यह मानव के हाथ में है। अट्ठारह पापों में से छठे पाप क्रोध का वर्णन करते हुए साध्वी ने कहा कि भगवान महावीर के जीवन में अनेक कष्ट आए फिर भी भगवान ने किसी पर क्रोध नहीं किया। हमें क्रोध आने का थोड़ा सा निमित्त मिलते ही हम बेकाबू हो जाते हैं। लेकिन हमारा संकल्प होना चाहिए कि कम से कम हम धर्म स्थान में हम क्रोध नहीं करें। हमारा स्वभाव क्रोध नहीं करने का होना चाहिए। क्रोधी व्यक्ति का घर नरक बन जाता है। वह स्वयं तो जलता ही है घर के दूसरे सदस्यों को भी जलाता है। हमारे अंदर सहनशीलता की कमी हो होने के कारण हमें क्रोध आ जाता है। अगर हमने क्रोध को शांत करना सीख लिया सहनशीलता बढ़ा दी तो हमारा घर स्वर्ग बन सकता है।

इससे पूर्व साध्वी अनुज्ञाश्री ने विचार व्यक्त किए।साध्वी प्रियांगीश्री ने चातुर्मास संबंधी सूचनाएं दीं। बल्लारी से पुखराज भूरट उपस्थित थे।

सहमंत्री विनोद भूरट ने संचालन किया।