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एमबीबीएस की सीट नहीं मिली तो डेंटल ही सही

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार एनइइटी NEET की कटऑफ बहुत अधिक थी। छात्र और अभिभावक चिंतित थे कि अगले साल हालात और खराब हो सकते हैं। इसलिए, कई लोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। एमबीबीएस का सपना छोड़कर बीडीएस चुना।

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MBBS seat

- बदलता रुझान: पांच वर्ष बाद सभी बीडीएस सीटों को मिले उम्मीदवार

- एमबीबीएस की सीटें भी भरीं

रुझान बदलने के साथ ही मेडिकल Medical के बजाय डेंटल Dental पाठ्यक्रम की मांग बढ़ी है। कर्नाटक परीक्षा प्राधिकरण (केइए) इस बार मेडिकल (MBBS) और डेंटल (BDS) की सभी सीटों को भरने में कामयाब रहा। काउंसलिंग के नतीजे उत्साहजनक रहे। पांच वर्षों के बाद बीडीएस की सभी सीटें भरी हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार एनइइटी NEET की कटऑफ बहुत अधिक थी। छात्र और अभिभावक चिंतित थे कि अगले साल हालात और खराब हो सकते हैं। इसलिए, कई लोग कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे। एमबीबीएस का सपना छोड़कर बीडीएस चुना।

स्ट्रे-वैकेंसी राउंड

केइए के कार्यकारी निदेशक एच. प्रसन्ना ने बताया कि केइए ने इस वर्ष लगभग 2,650 बीडीएस सीटें और 9,181 एमबीबीएस सीटों की काउंसलिंग की। एमबीबीएस की चार और बीडीएस की 32 सीटें खाली थीं। लेकिन, स्ट्रे-वैकेंसी राउंड में सभी सीटें भर गईं। पिछले साल एक एमबीबीएस सीट और 199 बीडीएस सीट खाली रही थीं। 2020 में बीडीएस की 1,398 सीटें और 2021 में 1,411 सीटें खाली रही थीं। वर्ष 2022 में भी 693 सीटों के लिए कोई दावेदार नहीं था।

प्रतिस्पर्धा के कारण मांग बढ़ी

सरकारी डेंटल कॉलेज के डीन और निदेशक गिरीश बी. ने बताया कि पिछले साल कई बीडीएस कॉलेजों में 10-15 सीटें खाली थीं। इस बार मांग ज्यादा है। नीट उम्मीदवारों की बढ़ती संख्या और इसके परिणामस्वरूप बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण मांग बढ़ी है।

रुझान बदलता रहता है

राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एम.के. रमेश ने कहा, एक दौर था जब इंजीनियरिंग की पढ़ाई जोरों पर थी। एमबीबीएस और बीडीएस उन लोगों के बीच पसंदीदा विषय है, जो गणित नहीं चाहते। इस बीच आयुर्वेद काफी लोकप्रिय रहा। रुझान बदलता रहता है।