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अज्ञान जीवन सबसे बड़ा अभिशाप-साध्वी भव्यगुणाश्री

केंटोनमेंट में धर्मसभा का आयोजन

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अज्ञान जीवन सबसे बड़ा अभिशाप-साध्वी भव्यगुणाश्री

अज्ञान जीवन सबसे बड़ा अभिशाप-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. मुनिसुव्रत स्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ केंटोनमेंट में साध्वी भव्यगुणाश्री ने कहा कि अज्ञान जीवन के लिए सबसे बड़ा कलंक और अभिशाप है सबसे बड़ा शत्रु है। अज्ञान हलाहल ज़हर जो आत्मा का जन्म जन्मांतर तक पतन करता है। एक शब्द का ज्ञान आत्मा तीन लोक की संपत्ति से बढ़कर है सबसे बड़ा दान विद्यादान है। ज्ञान के धन को कोई चुरा नहीं सकता, जला नहीं सकता, बांट नहीं सकता, संकट में सच्चा साथी यही है। आध्यात्मिक ज्ञान सर्वश्रेष्ठ ज्ञान है, जिसके माध्यम से संस्कारों का निर्माण होता है। संस्कृति का ज्ञान होता है चरित्र का संचार होता है। ज्ञान के धन को जितना बांटते हैं उतना ही बढ़ता है। सम्यक ज्ञान के प्रकाश से पूरे विश्व को आलोकित एक ही आत्मा कर सकती है। बुराई बीमारी और अपराध से मुक्ति दिलाने के लिए ज्ञान हृदय परिवर्तन के लिए रामबाण औषधि के समान है।

साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि विद्या के बिना मनुष्य अंधे के समान है। विद्या ऐसा धन है जिसे न चोर चुरा सकता है, न राजा दंड में ले सकता है, न भाई बांट सकता है और न कभी यह बोझ हो सकता है। अत: हर एक व्यक्ति को अधिक-से-अधिक विद्या प्राप्त करनी चाहिए। 'सुख चाहै विद्या पढ़े, विद्या है सुख-हेतु।विजयराज, शुभम, संगीता, रुचिका गादिया परिवार ने कामली अर्पण की। मोहनलाल बोहरा ने बताया कि साध्वी की निश्रा में जिनालय 69 वां ध्वजारोहण कार्यक्रम होगा। साध्वी 25 फरवरी तक मुनिसुव्रत स्वामी जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ में रहेंगी।