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राष्ट्रीय चेतना में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका: सिंह

समारोह में जगी राष्ट्रीयता की अलख राजस्थान पत्रिका व अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था का आयोजन

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बेंगलूरु. रामचरित मानस, कबीर का साहित्य, टैगोर की कविताएं इन सबका राष्ट्रीय चेतना में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। स्वतंत्रता के आंदोलन में भी साहित्यकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ऊर्दू की शायरी ने भी जनमानस को प्रभावित और प्रेरित किया। जाहिर है, राष्ट्रीय चेतना में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि, यह धीरे-धीरे पड़ने वाला प्रभाव होता है। यह विचार राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक अजय कुमार सिंह के हैं।

राजस्थान पत्रिका, बेंगलूरु एवं अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित आजादी का अमृत महोत्सव-2023 समारोह में बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि जो साहित्य का स्रोत है वही राष्ट्रीय चेतना का स्रोत भी है। इसलिए दोनों एक-दूसरे से प्रेरित प्रभावित होते हैं। हमारा संविधान हमारी राष्ट्रीय चेतना को ही समेटने का एक प्रयास है। आज की परिस्थितियों में साहित्यकारों को यह सोचना चाहिए कि कैसा साहित्य रचें। एक ऐसा समाज बने जिसमें सभी को समान विकास के अवसर हों। हमें यह भी देखना होगा कि किस तरह की चेतना हमारे राष्ट्र के लिए श्रेष्ठ होगी।

जे.सी. रोड स्थित जैन विश्वविद्याल के सभागार में आयोजित समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ. इस्पाक अली ने कहा कि शहरों में स्वतंत्रता दिवस को लेकर उदासीनता या खानापूर्ति दिखाई देती है। गांवों में आज भी स्वतंत्रता दिवस का अर्थ छुट्टी नहीं, सामूहिक समारोह है। पूरे गांव के लोग जुड़ते हैं। प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं। यह चिंतानजक है कि अंग्रेजों ने जो अंग्रेजियत छोड़ी वह आज भी फल-फूल रही है।

विशिष्ट अतिथि कर्नल कविल मनोज ने बताया कि सियाचिन ग्लेशियर जैसे दूर-दराज के स्थानों में पुस्तकें और साहित्य ही सैनिकों के साथी बनते हैं। हर यूनिट में पुस्तकालय होती है।राजस्थान पत्रिका के सम्पादकीय प्रभारी जीवेन्द्र झा ने कहा कि युवाओं को साहित्य से जोड़ा जाना जरूरी है। नई पीढ़ी में संवेदना हो, जागरूकता हो, दायित्व बोध हो, उच्च विचार हों, देशप्रेम हो, इसके विकास में साहित्य महत्वपूर्ण निभा सकता है।

अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय संस्था की संस्थापक डॉ. इंदु झुनझुनवाला ने स्वागत किया। दीप प्रज्ज्वलन के बाद अभ्युदय का ध्येय गीत प्रस्तुत किया गया। आदर्श कॉलेज की छात्रा मानसी ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इस मौके पर गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों पर संस्था की ओर से प्रकाशित पुस्तक वो जो गुमनाम रहे का विमोचन किया गया।

जननी जन्मभूमि की धूलि लगाई माथे पे...

समारोह के दूसरे चरण में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। मशहूर गजलकार कमल सिंह राजपूत ने आओ हम सब मिलकर नवभारत का निर्माण करें जैसी पंक्तियों से राष्ट्रीयता की अलख जगाई। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. प्रेम तन्मय ने शहर बड़ा चुप है ये क्या ढंग है की प्रस्तुति देते हुए वाह-वाही लूटी। डॉ. इंदु झुनझुनवाला ने कई कविताओं के साथ ऐे मेरे प्यारे वतन गीत की प्रस्तुति दी। उन्होंने जननी जन्मभूमि की धूली लगाई माथे पे, तोडक़र हर रिश्ते नाते यूं वफा करता गया, की प्रस्तुति दी तो माहौल में देशप्रेम की खुशबू बिखर गई। सरिता पाण्डेय ने शहीदों ने सिखाया है, गीत की सम्मोहक प्रस्तुति दी।

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