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शब्दों में आत्मीयता रखने वाला ही शहंशाह

मुनि ने कहा कि प्रभु के गीत, भक्ति भाव भरे शब्दों को निकालने वाली जुबान वचन सिद्ध होती है

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शब्दों में आत्मीयता रखने वाला ही शहंशाह

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि जिसके शब्दों में आत्मीयता होती है वही शहंशाह होता है। ओछे, अभद्र तथा असभ्य शब्द कहने वाले इंसान को लोग घटिया ही समझते हैं। यह उसकी सबसे बड़ी गरीबी होती है यानी व्यक्ति का रुतबा, हैसियत और शहंशाही वसीयत से नहीं बल्कि शब्द, वाणी की सुंदर परंपरा से है।

मुनि ने कहा कि प्रभु के गीत, भक्ति भाव भरे शब्दों को निकालने वाली जुबान वचन सिद्ध होती है। व्यक्ति को मौन रहना चाहिए अन्यथा मीठा व नपा तुला हुआ ही बोलना चाहिए। व्यक्ति वचन-सिद्ध इसीलिए नहीं है क्योंकि वह झूठ बोलता है, क्रोध करता है व ज्यादा भी बोलता है। संतों के लिए भी आगमों में निर्देश हैं कि प्रवचन के अलावा बोलना ही नहीं चाहिए।

संत के भी अनर्गल बोलने पर वाणी की गरिमा गिर जाती है। धर्म से रहित वाणी अशांति के बीज बोती है। धर्म यानी प्रेम, अहिंसा, करुणा, मैत्री से है। जिन शब्दों में मैत्री, करुणा, शांति ना हो वह शब्द अशांत ही होंगे। प्रारंभ में रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण दिया। अर्हम मुनि ने गीतिका सुनाई। संचालन महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने किया।

कार्याध्यक्ष प्रकाशचंद बम्ब ने बताया कि चौमुखी जाप के लाभार्थी रंजना निर्मल गुलेच्छा का जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया गया। सभा में रतन सिंघी, अशोक रांका, लादूलाल ओस्तवाल तथा दिल्ली व नागपुर सहित शहर के विभिन्न उपनगरीय संघों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। श्राविका संगीता छलाणी ने सिद्धि तप की तपस्या का पच्चखान लिया। महिला अध्यक्ष रंजना गुलेच्छा, मंत्री पुष्पा बोहरा, शकुंतला जैन व पायल समदडिय़ा ने सम्मान किया।

चातुर्मास की विनती
बेंगलूरु. चेन्नई गए प्रतिनिधिमंडल ने जैन स्थानकवासी मेमोरियल ट्रस्ट प्रांगण में उपाध्याय प्रवीण ऋषि के दर्शन कर 2019 के बेंगलूरु चातुर्मास की विनती की। किशनलाल कोठारी, रणजीतमल कानूंगा, शांतिलाल लोढ़ा, शांतिलाल भंडारी, पदम मेहता, आनंद कोठारी, ज्ञानचंद बाफना आदि उपस्थित थे।