21 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

स्टारलिंक या वन-वेब की तरह उपग्रहों का नक्षत्र तैयार करेगी भारतीय कंपनी!

इसरो अध्यक्ष एस.सोमनाथ कर रहे कई कंपनियों से बात अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा व्यापक प्रभाव

2 min read
Google source verification

केंद्र सरकार की ओर से चार बड़ी वैज्ञानिक परियोजनाओं को मंजूर किए जाने के बाद भारतीय अंतरिक्ष अन्वेषण कार्यक्रम के अगले दो दशक की रूपरेखा तय हो गई है। लेकिन, भू-स्थैतिक कक्षा (जीएसओ) और पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) को लेकर भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की क्या जरूरतें हैं और क्या योजना है?
इसरो अध्यक्ष एस.सोमनाथ ने पत्रिका के साथ बातचीत में कहा कि, अगर कोई भारतीय मूल की कंपनी स्टारलिंक या वन वेब की तरह पृथ्वी की निचली कक्षा में उपग्रहों का एक बड़ा नक्षत्र स्थापित करे और वैश्विक स्तर पर उसका परिचालन हो तो देश की अर्थव्यवस्था पर उसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा। इसरो और देश की नीतियां इसका पूरा समर्थन करती हैं लेकिन, इसके लिए बड़े निवेश की जरूरत होगी। दरअसल, स्टारलिंक और वन वेब अपने उपग्रहों के एक विशाल नेटवर्क के जरिए विश्व के कई देशों को ब्राड बैंड और संचार सहित कई तरह की सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।

जीएसओ में 18 उपग्रह ऑपरेशनल
इसरो अध्यक्ष ने कहा कि, भू-स्थैतिक कक्षा में हमारे 18 उपग्रह ऑपरेशनल हैं। हम इसकी क्षमता और बढ़ाना चाहते हैं। भू-स्थैतिक कक्षा में भेजे जाने वाले उपग्रहों के निर्माण और प्रक्षेपण की जिम्मेदारी न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एन-सिल) को सौंपी गई है। अब हम निजी कंपनियों को भी प्रोत्साहित कर रहे हैं कि, वे अपने उपग्रह का निर्माण कराएं और उनका प्रक्षेपण कराएं। भू-स्थैतिक कक्षा में स्लॉट और फ्रीक्वेंसी हासिल करने के लिए पंजीकरण करना होगा। तो यहां काफी बदलाव हो रहे हैं।

लियो अब राष्ट्रीय नहीं, वैश्विक
जहां तक, पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) का सवाल है तो यह अब राष्ट्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक हो चुका है। जो भी उपग्रह निचली कक्षा में भेजे जा रहे हैं वे वैश्विक घटनाक्रम का हिस्सा हैं। वन-वेब और स्टारलिंक ने इसमें अपने उपग्रहों की शृंखला लांच कर एक बड़ा नक्षत्र तैयार किया है। क्या एक भारतीय कंपनी भी ऐसा कर सकती है? क्या वह, वैश्विक स्तर पर इसका परिचालन करने में सक्षम है? हमें नहीं मालूम कि, किसी में यह क्षमता है या नहीं। लेकिन, हमें इसके लिए क्षमता विकसित करनी होगी। सोमनाथ ने कहा कि, वह कई बड़ी संचार कंपनियों के साथ इस विषय पर बात कर रहे हैं कि, क्या वे पृथ्वी की निचली कक्षा में अपना नक्षत्र स्थापित करेंगी? अगर ऐसा होता है तो यह भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण होगा। इसका वाणिज्यिक और अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।