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भारत-नेपाल के रिश्ते राजनीतिक कम व्यक्तिगत ज्यादा : हमाल

सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से दोनों देशों के लोग जुड़े हैं। राजनीतिक पहलुओं की बात करें तो दोनों देशों के रिश्तों के बीच उतार-चढ़ाव आते रहते हैं।

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भारत-नेपाल के रिश्ते राजनीतिक कम व्यक्तिगत ज्यादा : हमाल

भारत-नेपाल के रिश्ते राजनीतिक कम व्यक्तिगत ज्यादा : हमाल

बेंगलूरु. सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रूप से दोनों देशों के लोग जुड़े हैं। राजनीतिक पहलुओं की बात करें तो दोनों देशों के रिश्तों के बीच उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। आरोप-प्रत्यारोप भी लगते रहते हैं। महाविनाशकारी भूकंप के दौरान भारत से काफी मदद मिली लेकिन नेपाली संविधान और मधेसियों के मुद्दे पर हुई आर्थिक नाकेबंदी से दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट जरूर सामने आई। दोनों देशों के लोगों के बीच एक-दूसरे के प्रति सम्मान है।


केरल और कोडुगू में आई बाढ़ से मची तबाही के बीच आपदा सहयोग राशि जुटाने के लिए गोरखाली हेङ्क्षल्पग ट्रस्ट की ओर से आयोजित भारतीय-नेपाली उत्सव में हिस्सा लेने अपनी पत्नी मधु भट्टराई के साथ बेंगलूरु पहुंचे नेपाल के चर्चित अभिनेता राजेश हमाल ने पत्रिका से सिनेमा सहित अन्य मुद्दों पर विशेष बातचीत के दौरान ये विचार व्यक्त किए।


नेपाल को अपेक्षित विकास का इंतजार
उन्होंने बताया कि राजनीतिक कारणों से नेपाल का अपेक्षा अनुसार विकास नहीं हो सका है। नेपाल के राजनीतिक माहौल और नेताओं के कामकाज से वे उतने संतुष्ट नहीं हैं। हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार हावी है और खामियाजा नागरिक भुगत रहे हैं। रोजी-रोटी के लिए लोगों को देश छोडऩा पड़ रहा है। लगभग हर घर का सदस्य या तो विदेश में नौकरी कर रहा है या जाने की कोशिश में है।


पिता के विरोध के बावजूद फिल्मों में आए
वर्ष १९८८ में फिल्मी दुनिया में कदम रख अब तक ३०० से भी ज्यादा फिल्मों में अभिनय कर १३ से ज्यादा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुके हमाल ने बताया कि उनके पिता नहीं चाहते थे कि वे फिल्मी दुनिया में जाए क्योंकि उस समय विशेषकर नेपाली सिनेमा में खास संभावनाएं नहीं थी। दो वर्ष में मुश्किल से दो फिल्म बनती थी। विरोध के बावजूद उन्होंने फिल्मी दुनिया को चुना। पिता इतने नाराज हुए कि बातचीत बंद कर दी। इसके बाद दोनों में कभी बातचीत नहीं हुई। पिता नेपाली राजूदत थे। पाकिस्तान में पोस्टिंग के दौरान हृदयाघात से उनकी मृत्यु हो गई। हमाल को दुख है कि उनकी सफलता देखने के पहले ही पिता दुनिया छोड़ गए।


भारत में हुई पढ़ाई-लिखाई
हमाल ने बताया, बचपन से ही भारत से उनका गहरा नाता रहा है। प्रारंभिक स्कूली शिक्षा दिल्ली में हासिल की। पंजाब से अंगे्रजी साहित्य में एमए किया। इस दौरान उन्होंने एक भारतीय पत्रिका के लिए मॉडलिंग की। दिल्ली और काठमांडू में बतौर मॉडल उन्होंने खुद को स्थापित किया। भारतीय सिनेमा में अभिनय की कोशिश की पर बात नहीं बनी। जिसके बाद उन्होंने नेपाली सिनेमा का रुख किया।


फिल्म व समाज एक-दूसरे के पूरक
फिल्में और समाज एक दूसरे के पूरक हैं। आमतौर पर फिल्में समाज की गतिविधियों, प्रथाओं व कुरितियों को रखांकित करती हैं। कई बार फिल्मों से समाज प्रभावित होता है। कई मामलों में समाज भी फिल्मों को अपने अनुरूप बदलने पर विवश कर देता है। फिल्में समाज के मनोरंजन का एक सशक्त माध्यम है। इनका प्रयोग समाज में जनचेतना और शिक्षाप्रद संदेशों को प्रसारित करने में किया जाना चाहिए।

दर्शक फिल्मों के न्यायाधीश
बहुत से फिल्मकारों की फिल्में नारी देह का प्रदर्शन कर धन कमाने के लिए लूटमार, अपराध, हत्याएं, बलात्कार, वेश्यावृति आदि विषयों पर आधारित होती हंै। बोल्ड विषय के नाम पर इन फिल्मों को बनाया जाता है। लेकिन हर चीज की एक सीमा होती। दर्शकों को भी पता चलता है की फिल्मकार का उद्देश्य क्या है। फिल्मों का अंतिम न्यायाधीश दर्शक ही होता है जो इनकी दशा एवं दिशा दोनों को तय करते हुए निर्णय लेता है कि किस फिल्म को देखना है और किसे नहीं।