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महंगाई की मार : होटलों से इरुली दोसा नदारद, सलाद से प्याज

बेंगलूरु में कई लोगों ने प्याज खानी छोड़ दी

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महंगाई की मार : होटलों से इरुली दोसा नदारद, सलाद से प्याज

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बेंगलूरु. बाजार में प्याज के बढ़ते मूल्य के कारण अब घरों की रसोई से लेकर होटलों तक में जायके का स्वाद फीका पड़ रहा है। स्थिति है कि कई लोगों ने प्याज खानी छोड़ दी है तो होटलों में प्याज से बने व्यंजन नहीं मिल रहे हैं।

प्याज की कीमत में इस अप्रत्याशित वृद्धि के कारण शहर के कई होटलों में सभी किस्म के दोसे उपलब्ध है लेकिन उपभोक्ताओं को इरुली दोसा यानीओनियन दोसा नहीं परोसा जा रहा है। कई होटलों ने पिछले कुछ दिनों से इरुली दोसा बनाना बंद कर दिया है। इसी तरह, ठेेले पर भेल पूरी, पानीपुरी बेचनेवालों ने भी प्याज का उपयोग नियंत्रित कर दिया या फिर बंद कर दिया है। प्याज के कई व्यंजनों के लिए मशहूर पंजाबी ढाबों में भी अब ग्राहकों को अलग से प्याज नहीं दी जा रही है। यहां पर ग्रीन सलाद की प्लेट से प्याज नदारद है।

प्याज की बढ़ती कीमतों पर बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इससे केवल दलाल चांदी काट रहे हैं। पहले प्याज के गिरते खरीदी मूल्य ने किसानों को रुलाया था और अब प्याज उपभोक्ताओं को रुला रहा है। मूल्य वृद्धि का किसानों को कोई लाभ नहीं हो रहा है।

शुक्रवार को भी राज्य की विभिन्न कृषि उपज मंडियों में प्याज का थोक खरीदी मूल्य 75 से 95 रुपए प्रति किलो रहा, वहीं खुदरे बाजार में प्याज 80 से 120 रुपए प्रति किलो मूल्य पर बेचा गया। बेंगलूरु ही नहीं राज्य के अन्य सभी शहरों में प्याज की कीमत करीब १०० रुपए के भाव को छू रही है। लेकिन, इसका कोई लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है। दरअसल किसानों ने अपनी फसल कई महीने पहले ेबेच दी थी और अब उसे व्यापारी बढ़ी कीमतों पर बेचकर जोरदार मुनाफा कमा रहे हैं।

अभी खानी होगी महंगी प्याज
राज्य के प्याज उत्पादक जिले गदग, रायचूर, धारवाड़, चित्रदुर्गा में बेमौसमी बारिश के कारण प्याज की फसल तहस नहस हो गई है। इससे कृषि उपज मंडियों में प्याज की आवक में भारी गिरावट हो गई है। मांग तथा आपूर्ति में खाई बढऩे के कारण प्याज के मूल्यों में भारी उछाल हो रहा है। मौजूदा स्थिति से फिलहाल राहत की उम्मीद भी नहीं दिखती क्योंकि दिसम्बर माह के दूसरे सप्ताह तक यह उछाल जारी रहने की संभावना है।