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जयपुर समेत 6 शहरों में खुलेगा इसरो का केंद्र

इसरो परियोजनाओं पर होगा अनुसंधान,शुरु होगी क्षेत्रीय अंतरिक्ष अकादमी  

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ISRO tripura

जयपुर समेत 6 शहरों में खुलेगा इसरो का केंद्र

बेंगलूरु. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) जयपुर सहित देश के छह शहरों में क्षेत्रीय अंतरिक्ष अकादमी केंद्र खोलेगा। इन केंद्रों में इसरो की विभिन्न परियोजनाओं पर अनुसंधान होगा।
इसरो अध्यक्ष के.शिवन ने यहां मंगलवार को बताया कि ये मूलत: अनुसंधान केंद्र होंगे और जहां अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से संबंधित नए सिद्धांतों का प्रतिपादन भी होगा। उन्होंने बताया कि अगले महीने तक जयपुर में पहले केंद्र का उद्घाटन हो जाएगा। इस पर दो करोड़ रुपए का निवेश इसरो करेगा। जयपुर के अलावा पटना, गुवाहाटी, बनारस, कुरुक्षेत्र और कन्याकुमारी में भी ऐसे क्षेत्रीय अकादमी खोले जाएंगे। इसके अलावा देश भर में छह अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी इन्कुबेशन केंद्र (एस-टीआइसी) भी खोले जाएंगे जहां अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उत्पाद तैयार होगा। इन्कुबेशन केंद्रों की स्थापना निजी क्षेत्र के सहयोग से की जाएगी लेकिन अंतरिक्ष अकादमी इसरो का अपना केंद्र होगा जिसमें निजी क्षेत्र शामिल नहीं होंगे। पहले इन्कुबेशन केंद्र की स्थापना त्रिपुरा की राजनधानी अगरतल्ला में की गई है। इसका उद्घाटन मंगलवार को त्रिपुरा के मुख्यमंत्री विप्लब कुमार देव ने बेंगलूरु से रिमोट द्वारा किया। अगरतल्ला के अलावा ऐसे 5 और केंद्र जालंधर, नागपुर, इंदौर, भुवनेश्वर और त्रिची में स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि देश के छह विश्वविद्यालयों में इसरो के शीर्ष वैज्ञानिकों के नाम पर पीठ स्थापित जाएगी। पहले पीठ का नामकरण प्रोफेसर सतीश धवन के नाम पर होगा और इसका उद्घाटन आगामी 11 अक्टूबर को जम्मू विश्वविद्यालय में होगा। इसी तरह अन्नामलई विश्वविद्यालय में डॉ श्रीनिवासन पीठ स्थापित होगा। जिन वैज्ञानिकों ने देश के विकास में अतुलनीय योगदान दिया है उनके नाम पर ऐसे पीठ स्थापित किए जाएंगे। असद-गोवारिकर के नाम भी एक पीठ स्थापित की जाएगी।

क्षमता निर्माण कार्यक्रम का हिस्सा
दरअसल, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता हासिल करने के बाद इसरो उसके अधिकतम उपयोग पर जोर दे रहा है और इसके लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। शिवन ने कहा कि क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत इसरो देश के ऐसे शहरों में अपने केंद्र (क्षेत्रीय अकादमी, इन्कुबेशन सेंटर या पीठ) स्थापित करेगा जहां पहले से उसका कोई केंद्र या गतिविधियां नहीं चल रही हो। साथ ही वह शैक्षणिक रूप से विकसित हो और उद्योगों की मौजूदगी हो। बेंगलूरु या हैदराबाद जैसे शहरों में इसरो के कई केंद्र हैं और ये इसरो की गतिविधियों के प्रमुख केंद्र हैं। इसलिए यहां ऐसे केंद्र स्थापित करने का कोई फायदा नहीं है। क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत इसरो देश के कोने-कोने तक पहुंचना चाहता है ताकि उन क्षेत्रों में छुपी प्रतिभाओं को बढ़ावा मिले और उनकी क्षमता का उपयोग हो सके। छह महीने के आउटरीच कार्यक्रम के दौरान इसरो देश के अधिकांश शहरों तक अपने केंद्र खोल देगा। इससे देश की प्रतिभा के संपूर्ण इस्तेमाल के साथ एक बड़ी खाई भरेगी।