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पहली छमाही में 4 से 5 मिशन प्रक्षेपित करेगा इसरो

10 जनवरी को पीएसएलवी सी-40 से शुरुआत, जीएसएलवी के तीन मिशन कतार में

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बेंगलूरु. हर साल 12 मिशन पूरा करने के लक्ष्य पर निगाहें टिकाए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वर्ष 2018 की पहली छमाही में ही तीन से चार मिशन पूरा करने की तैयारी कर रहा है। इनमें से तीन मिशन जीएसएलवी के जबकि एक मिशन पीएसएलवी का होगा। इसके अलावा एक मिशन टीम इंडस का हो सकता है जो गूगल लूनर एक्सप्राइज के तहत मार्च तक चांद की धरती पर अपना रोवर उतारेगा।
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार वर्ष 2018 की पहली छमाही के लिए कुछ महत्वपूर्ण मिशन कतार में है। इसकी शुरुआत आगामी 10 जनवरी से होगी जब पीएसएलवी सी-40 से कार्टोसैट श्रृंखला उपग्रह सहित 30 अन्य विदेशी उपग्रहों का प्रक्षेपण किया जाएगा। गत वर्ष पीएसएलवी सी-39 की लांचिंग में मिली नाकामी के बाद इसरो फिर एक बार अपनी जमीन मजबूत करने की तैयारी में है ताकि देश के अंतरिक्ष कार्यक्रमों को नई ऊंचाई तक पहुंचाया जाए। पीएसएलवी सी-40 के अलावा साल के मध्य तक जीएसएलवी के दो और जीएसएलवी मार्क-3 का एक प्रक्षेपण संभव है।
इसरो अधिकारियों के मुताबिक जो मिशन प्रस्तावित हैं उनमें जीएसएलवी एफ-08 से संचार उपग्रह जीसैट-6 ए, जीएसएलवी एफ-10 से चंद्रयान-2 और जीएसएलवी मार्क-2 डी-2 से जीसैट-29 का प्रक्षेपण किया जाएगा। संचार उपग्रह जीसैट-6 अपने पूर्ववर्ती उपग्रह जीसैट-6 ए जैसा ही उच्च शक्ति वाला एस-बैंड संचार उपग्रह (1-2 के बस संरचना) है जिसका वजन 2140 किलोग्राम है। यह उपग्रह आधारित मोबाइल आधारित संचार के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
वहीं जीएसएलवी मार्क-3 डी-2 को अप्रेल या मई महीने तक लांच करने की योजना है। हाल ही में विकसित इस भारी रॉकेट की यह दूसरी उड़ान होगी जिसमें वह जीसैट-29 उपग्रह को भू-स्थैतिक कक्षा में स्थापित करेगा। जीसैट-29 में इसरो कई नई तकनीकों का पहली बार प्रयोग करेगा। इसमें पहली बार उपग्रह को 1-3 के संरचना में तैयार किया गया और यह केए और केयू मल्टी बीम ऑप्टिकल संचार पे-लोड वाला पहला उपग्रह है। यह उपग्रह गांवों और शहरों के बीच डिजिटल खाई को दूर करेगा।

चंद्रयान-2 को लेकर उत्सुकता बढ़ी
हालांकि,पहली छमाही के दौरान हर किसी की निगाहें सबसे बड़े और महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-2 पर होगी। लगभग 3290 किलोग्राम वजनी चंद्रयान-2 का प्रक्षेपण जीएसएलवी एफ-10 से करने की योजना है। इसे मार्च महीने तक छोड़े जाने की उम्मीद है। इस मिशन में एक आर्बिटर के अलावा लैंडर और रोवर भी भेजा जाएगा। आर्बिटर चांद की 100 किमी वाली कक्षा में परिक्रमा करेगा जबकि लैंडर चांद की धरती पर उतरेगा जिससे रोवर निकलकर चांद पर चहलकदमी करते हुए कई महत्वपूर्ण प्रयोगों को अंजाम देगा। इसरो अपने चार मिशनों के अलावा टीम इंडस के चंद्र मिशन को भी लांच करेगा। टीम इंडस को भी अपना मिशन भेजने के लिए समय सीमा मार्च है जिसे पीएसएलवी से लांच किया जाएगा।