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इसरो उपग्रह केंद्र अब प्रो. यूआर राव उपग्रह केंद्र

भारतीय उपग्रह कार्यक्रमों के जनक प्रोफेसर यूआर राव के नाम पर इसरो उपग्रह केंद्र का नामकरण किया गया है।

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इसरो उपग्रह

इसरो उपग्रह केंद्र अब प्रो. यूआर राव उपग्रह केंद्र

बेंगलूरु. भारतीय उपग्रह कार्यक्रमों के जनक प्रोफेसर यूआर राव के नाम पर इसरो उपग्रह केंद्र का नामकरण किया गया है। अब बेंगलूरु स्थित इसरो उपग्रह केंद्र को प्रोफेसर यूआर राव उपग्रह केंद्र कहा जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया कि यह प्रस्ताव काफी पहले से था। इसरो के कई केंद्रों के नाम शीर्ष वैज्ञानिकों के नाम पर रखे गए हंै। अंतरिक्ष कार्यक्रमों के जनक विक्रम साराभाई के नाम पर तिरुवनंतपुरम स्थित इसरो केंद्र का नाम रखा गया है।


उसे विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (वीएसएससी) के नाम से जाना जाता है। इसी तरह श्रीहरिकोटा स्थित केंद्र का नामकरण प्रोफेसर सतीश धवन के नाम पर किया गया। उसे सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा (एसडीएससी, शार) के नाम से जाना जाता है।


अब प्रोफेसर यूआर राव जो उपग्रह कार्यक्रमों के जनक हैं उनके नाम पर इसरो उपग्रह केंद्र का नाम रखा गया है। अब इसे प्रोफेसर यूआर राव उपग्रह केंद्र के नाम से जाना जाएगा। दरअसल, प्रोफेसर राव ही इसरो उपग्रह केंद्र के संस्थापक निदेशक भी थे। उन्होंने वर्ष 1972 में देश में उपग्रह प्रौद्योगिकी की स्थापना की जिम्मेदारी उठाई। उन्हीं के मार्गदर्शन में 1975 में पहला भारतीय उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ लांच हुआ। उसके बाद उनके नेतृत्व में लगभग 20 उपग्रह तैयार किए गए और लांच हुए। देशके रॉकेट विकास में भी प्रोफेसर राव का अहम भूमिका रही। भारत की उपग्रह निर्माण क्षमता को आगे बढ़ाने में न सिर्फ उन्होंने अग्रणी भूमिका निभाई बल्कि अंतरिक्ष में उन्नति उनकी दूरदृष्टि का ही परिणाम है।

बेंगलूरु-मैसूरु राजमार्ग पर काटे जाएंगे 1615 पेड़
बेंगलूरु. प्रस्तावित बेंगलूरु-मैसूरु राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) ने १६१५ पेड़ों को काटने की योजना बनाई है। बेंगलूरु-मैसूरु राजमार्ग का उन्नयन राष्ट्रीय राजमार्ग २७५ के रूप में किया जा रहा है और इसी उन्नयन परियोजना के लिए पेड़ों को काटा जाना है। सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग की ओर से हाल ही में जारी एक अधिसूचना के अनुसार एनएचएआइ ने आम नागरिकों से पेड़ों को काटे जाने पर उनकी आपत्तियां आमंत्रित की जा रही हैं। नागरिकों की आपत्तियों पर समीक्षा और उचित जवाब के बाद पेड़ों को काटने को अंतिम रूप दिया जाएगा। परियोजना के लिए रामानगर और मंड्या के बीच राजमार्ग के किनारे स्थित 1,615 पेड़ों की नीलामी के प्रस्ताव को हाल ही में स्वीकार किया गया था।

इस नीलामी प्रक्रिया में पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। हालांकि एनaएचएआइ के परियोजना निदेशक की ओर से फिलहाल पेड़ों को काटने पर नागरिकों की आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। इसके लिए २५ मई तक आपत्तियां स्वीकारी जाएंगी। इसके अतिरिक्त अधिकारियों ने संबंधित विभागों से काटे गए पेड़ों को हटाने की मंजूरी भी प्राप्त कर ली है। परियोजना के तहत यह भी कहा गया है कि जब राजमार्ग को एनएच-२७५ के रूप में विकसित कर दिया जाएगा तब फिर से पौधरोपण किया जाएगा।