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डिजिटल क्रांति लाएगा इसरो का अब तक का सबसे वजनी उपग्रह

40 ट्रांसपोंडर, 6 टन वजन, 500 करोड़ लागत, -उपग्रह बनकर तैयार, जल्द रवाना किया जाएगा फेंच गुएना,-एरियन-5 से होगा प्रक्षेपण

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gsat 11

बेंगलूरु. देश का अब तक का सबसे वजनी संचार उपग्रह जीसैट-11 तैयार हो चुका है और जल्दी ही इसे फ्रेंच गुएना स्थित कौरू प्रक्षेपण स्थल भेज दिया जाएगा। इसे यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) के रॉकेट एरियन-5 से छोड़ा जाएगा। यह भारी संचार उपग्रह लगभग 5725 किलोग्राम (लगभग 6 टन) वजनी है और इसके सक्रिय होने के बाद डिजिटल इंडिया अभियान को काफी मदद मिलेगी।
इसरो के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक इस उपग्रह का प्रक्षेपण मार्च तक होने की उम्मीद है। फिलहाल जीसैट-11 के कुछ आखिरी परीक्षण इसरो उपग्रह इंटीग्रेशन एवं परीक्षण प्रतिष्ठान (आईएसआईटीई) में पूरा किया जा रहा है। अगले सप्ताह इस उपग्रह के सॉफ्टवेयर का भी परीक्षण किया जाना है। कुछ ही दिनों में इसे कौरू के लिए रवाना कर दिया जाएगा। अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के अनुसार यह उपग्रह देश की इंटरनेट और दूर संचार सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला साबित होगा। इससे देश में उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवा की शुुरुआत भी होगी। अपनी कक्षा (74 डिग्री पूर्वी देशांतर, भूस्थैतिक कक्षा) में ऑपरेशनल होने के बाद यह उपग्रह 14 गीगाबाइट प्रति सेकेंड (14 जीबीपीएस) की दर से आंकड़े संचारित करेगा। इससे शहरों के साथ गांव भी इंटरनेट से जुड़ेंगे और वाई-फाई सेवाओं की रफ्तार काफी तेज हो जाएगी।

ये है खासियत
इस उपग्रह में 40 उच्च क्षमता वाले 'के एÓ और 'के यूÓ बैंड ट्रांसपोंडर और मल्टी बिम्स हैं। इसके प्रत्येक सौर पैनल चार मीटर से भी अधिक बड़े हैं और यह 11 किलोवाट ऊर्जा उत्पादित करेंगे। यह उपग्रह 36 मेगाहटर््ज के 220 उपग्रहों की क्षमता के बराबर कार्य करेगा। इसका विकास 500 करोड़ रुपए की लागत से किया गया है और यह इसरो द्वारा तैयार किया गया अब तक का सबसे वजनी उपग्रह है।
क्षमता बढ़ाने का प्रयास कर रहा इसरो
इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार के अनुसार इसरो देश को नई क्षमता प्रदान करने का प्रयास कर रहा है। यह उपग्रह आधारित इंटरनेट सेवाओं के लिए बेहद उपयोगी होगा। डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण से पंचायतों और तालुकों को जोडऩे के अलावा सुरक्षा बलों के भी काम आएगा। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जीसैट-11 परियोजना को वर्ष 2009 में मंजूरी दी थी। इसरो इस उपग्रह की लांचिंग के लिए एरियन-5 की सेवाएं लेगा क्योंकि अभी भारतीय रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 की अधिकतम प्रक्षेपण क्षमता 4 टन है।