
बेंगलूरु. पृथ्वी की निचली कक्षाओं से लेकर अनंत आकाश में तारों पर नजर रखने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले सेंसर एवं इलेक्ट्रो ऑप्टिक उपकरणों के विकास में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक लंबा सफर तय किया है।
रॉकेट, उपग्रहों के पे-लोड या अन्य सपोर्ट सिस्टम का मस्तिष्क (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) कहे जाने वाले सेंसर किसी भी मिशन की जान होते हैं और उनक विकास उनकी जटिल प्रक्रिया है। मगर इसरो ने पिछले 25 वर्षों के दौरान इस तकनीक में महारत हासिल कर ली है।
इसरो ने कहा है कि उसकी प्रयोगशाला प्रयोगशाला इलेक्ट्रो ऑप्टिक प्रणाली (लियोस) ने पिछले 25 वर्षों के दौरान विश्व स्तरीय सेंसर एवं अन्य इलेक्ट्रोनिक प्रणालियों के विकास में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। पृथ्वी की निचली कक्षा (एलईओ) या भू-स्थैतिक कक्षा (जीईओ) अथवा अंतरग्रहीय मिशनों के लिए सटीक सेंसर के डिजाइन, विकास और उत्पादन के साथ ही उच्च विभेदन (हाई रिजोल्यूशन) वाली इलेक्ट्रो प्रणालियों का विकास भी यहीं होता है।
वहीं सुदूर संवेदन (रिमोट सेंसिंग) और मौसम भविष्यवाणी के लिए पेलोड का भी निर्माण इस केंद्र में होता है। दरअसल, इस केंद्र की शुरुआत यहां पीन्या स्थित एक औद्योगिक शेड में 25 साल पहले वर्ष 1992 में हुआ था लेकिन अब यह प्रयोगशाला विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित एवं पूरी तरह स्थापित हो चुकी है।
इसरो ने कहा है कि इसरो कार्यक्रमों की बढ़ती मांग और जरूरतों के हिसाब से यह प्रयोगशाला मुख्य रूप से तीन क्षत्रों सेंसर विकास, एप्लायड ऑप्टिक्स एवं सेंसर उत्पादन का काम करती है। सेंसर विकास के तहत फिलहाल इस प्रयोगशाला में सूर्य सेंसर (संभवत: आदित्य मिशन के लिए) का विकास किया जा रहा है। इसमें उच्च स्तर के सटीकता वाले सूर्य सेंसर के अलावा अर्थ सेंसर (भू-संवेदक), उन्नत स्टार ट्रैकर, चुंबकमापी, फाइबर आप्टिक जायरो आदि का विकास किया जा रहा है। वहीं एप्लायड ऑप्टिक्स विभाग रिमोट सेंसिंग उपग्रहों के लिए विभिन्न उपकरणों का निर्माण किया जाता है।
इस केंद्र ने अल्ट्रावायलट एवं इंफ्रारेड वेबलेंथ पर थीन फिल्म टेक्नोलॉजी में भी महारत हासिल की है। सेंसर उत्पादक विभाग अंतरिक्षयानों के लिए बड़ी संख्या में सेंसरों एवं इलेक्ट्रो ऑप्टिक उपकरणों का कुशल उत्पादन करता है। इसरो ने इस केंद्र का नाम आर्यभट्ट दिया है जो विशेष रूप से अत्याधुनिक परीक्षण सुविधाओं के साथ उत्पादन के लिए समर्पित है। इसरो ने कहा है कि फिलहाल भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों को ध्यान में रखते हुए यहां कई प्रणालियों, उप प्रणालियों का विकास प्रगति पर है।
इस केंद्र के 25 साल (रजत जयंती) पूरे होने पर इसरो अध्यक्ष एएस किरण कुमार ने कहा कि अंतरिक्ष मिशनों में इस केंद्र की सेवाएं बेहद महत्वपूर्ण है। इस केंद्र ने अंतरिक्ष और सामाजिक आर्थिक अनुप्रयोगों में सराहनीय भूमिका निभाई है। इनोवेशन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इस प्रौद्योगिकी में आगे बने रहने की जरूरत है।
Published on:
31 Dec 2017, 9:05 PM IST
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