
बेंगलूरु. जनता दल (ध) ने पिछले महीने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ चुनावी गठबंधन की घोषणा की थी। समझौते के तहत बसपा को २० सीटें मिलने थी। दोनों दलों के बीच गठजोड़ की घोषणा के बाद बसपा प्रमुख मायावती ने बेंगलूरु में पूर्व प्रधानमंत्री एच डी देवेगौड़ा के साथ रैली भी की थी लेकिन उसके बाद से बसपा गठजोड़ को लेकर मौन साधे हुए है।
मायावती की छह रैली होनी थी लेकिन पहली रैली के बाद बसपा ने मौन साध लिया है। न तो अब तक उम्मीदवारों की घोषणा हुई है और ना ही मायवती की रैलियों का। हालांकि, जद (ध) के नेताओं का कहना है कि बसपा के साथ उनका गठबंधन बरकरार है। बसपा नेताओं का कहना है कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। सब कुछ लखनऊ में तय हुआ था। चुनाव लडऩे पर फैसला भी आलाकमान ही करेगा। जानकारों का कहना है कि गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के नतीजों को देखकर मायावती जद (ध) से राज्य विधानसभा चुनाव में गठजोड़ को लेकर ज्यादा उत्सुक नहीं है। उनका मानना है कि बसपा की प्रतिद्वंदिता भाजपा से है, कांग्रेस से नहीं।
अगर बसपा चुनाव में उम्मीदवार उतारती है तो भाजपा विरोधी दलित मतों के विभाजन से भाजपा को ही फायदा होगा।
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एमआइएम अब भी संशय में
बेंगलूरु. सांसद असुद्दीन औवेसी के नेतृत्व वाला ऑल इंडिया मजिलस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआइएमआइएम) ने अब तक विधानसभा चुनाव में उम्मीदवार उतारने को लेकर कोई फैसला नहीं किया है। १० अप्रेल को हैदराबाद में हुई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में भी स्थिति साफ नहीं हो पाई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अभी चुनाव लडऩे के नफा-नुकसान का आकलन किया जा रहा है उसके बाद ही उम्मीदवार उतारने पर फैसला होगा। पार्टी पहले ही चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुकी है। बताया जाता है कि औवेसी ने गठबंधन के लिए जनता दल (ध) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच डी देवेगौड़ा से संपर्क भी किया था लेकिन देवेगौड़ा ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसके बाद पार्टी हैदराबाद निजाम के इलाके से जुड़े जिलों में उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही थी। पार्टी की नजर सीमावर्ती इलाके की ५० सीटों पर है। बीदर और बसव कल्याण के स्थानीय निकायों में एआइएमआइएम के कुछ पार्षद हैं। पार्टी ने बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका के पिछले चुनाव में भी कुछ उम्मीदवार उतारे थे लेकिन पार्टी को कोई सफलता नहीं मिली। पार्टी के एक नेता ने कहा कि हमें इस बात की आशंका है कि उम्मीदवार उतारने पर अल्पसंख्यक मतों के विभाजन का फायदा भाजपा को मिल सकता है और इसी कारण फैसले में देरी हो रही है।
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राकांपा नहीं लड़ेगी चुनाव, कांग्रेस को समर्थन
बेंगलूरु. जनता दल (ध) के साथ गठबंधन नहीं होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने अब विधानसभा चुनाव नहीं लडऩे की घोषणा की है। साथ ही पार्टी ने कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है। राकांपा ने पहले जनता दल (ध) के साथ गठबंधन करने और महाराष्ट्र से सटे बेलगावी और अन्य जिलों में उम्मीदवार उतारने की घोषणा की थी लेकिन पवार के महाराष्ट्र एकीकरण समिति (एमइएस) के कार्यक्रम में भाग लेेने के बाद जनता दल (ध) ने राकांपा के साथ गठबंधन तोडऩे की घोषणा कर दी थी। राकांपा को 7 सीटें गठबंधन में मिली थी। राकांपा नेता डी पी त्रिपाठी ने कहा कि भाजपा को हराना मकसद है इसलिए हमने चुनाव नहीं लडऩे और कांग्रेस को बिना शर्त समर्थन देने की घोषणा की है।
Published on:
13 Apr 2018 05:42 pm
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