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चार स्तंभों पर टिका हुआ है जिनशासन-साध्वी भव्यगुणाश्री

अजितनाथ मूर्तिपूजक संघ में धर्मसभा का आयोजन

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चार स्तंभों पर टिका हुआ है जिनशासन-साध्वी भव्यगुणाश्री

चार स्तंभों पर टिका हुआ है जिनशासन-साध्वी भव्यगुणाश्री

बेंगलूरु. अजितनाथ जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ नगरथपेट में साध्वी भव्यगुणाश्री ने धर्मसभा में कहा कि जीवन एक पुस्तक है। प्रभुवीर के शासन में जीने वाले हम, इस पुस्तक का उपयोग किस प्रकार करते हैं। इसका चिंतन हमें करना है। चार स्तंभों पर टिका हुआ है हमारा शासन, ये स्तंभ साधु, साध्वी, श्रावक, श्राविका हैं। इन सबके अलग-अलग कर्तव्य एवं व्यवहार शैली है। हम सांसारिक अनेक कर्तव्य को निभाना अच्छी तरह जानते हैं परंतु हमारे हृदय में यह विचार आना भी उतना ही जरूरी है कि हमारा अपने शासन के प्रति क्या कर्तव्य है। संसार में धन, वैभव, मद आदि की प्रधानता है। जबकि हमारे शासन में त्याग की, वैराग्य की प्रधानता है। हमें धनवान नहीं, गुणवान बनना है। साध्वी शीतलगुणाश्री ने कहा कि करलो ओली भरलो पुण्य की झोली अमंगल को टालने का उपाय है आयांबिल मनोकामनाओ की पूर्ति का आधार है।मनोवृत्तियों पर नियंत्रण की प्रकिया है। दुर्भाग्य को दूर करने का तरीका है। सौभाग्य शाली जीवन का वरदान है आयांबिल। चैैत्र माह में सुद आठम से पूनम तक आयांबिल ओली की आराधना की जाती है। 29 मार्च से प्रारंभ होगी और 6 अप्रेल को पूर्णाहुति होगी। भाग्यशालियों बस आप शुरूवात करें ,हमें सिर्फ पहला कदम भरना है, शेष अरिहंत परमात्मा पर छोड़ देना है। किशोर कुमार जियानी ने बताया कि साध्वी के दर्शन करने पारस भंसाली, डूंगरमल चोपड़ा, शिव शर्मा, कुंदनमल रामाणी, आखिल भारतीय राजेन्द्र सूरि परिषद की राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रेमा बेन गांधीमूथा, लीला बेन रामाणी आदि उपस्थित रहे।