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जीएसटी को लेकर बनी संयुक्त संघर्ष समिति

सिंघला अध्यक्ष व मेहता मंत्री मनोनीत

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जीएसटी को लेकर बनी संयुक्त संघर्ष समिति

जीएसटी को लेकर बनी संयुक्त संघर्ष समिति

बेंगलूरु. फैडरेशन ऑफ टेक्सटाइल एंड गारमेंट एसोसिएशन की बैठक बुधवार को दी बेंगलूरु होलसेल क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन कार्यालय में हुई। बैठक में जीएसटी दरों में वृद्धि के विरोध में जरूरत पडऩे पर संयुक्त आंदोलन करने के लिए कर्नाटक में फैडरेशन ऑफ टेक्सटाइल एंड गारमेंट एसोसिएशन का गठन किया गया।
फैडरेशन में दी बेंगलूरु होलसेल क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन, कर्नाटक होजरी एंड गारमेंट एसोसिएशन (खागा), साउथ इंडिया और थोक व्यापारी संघ, मैसूर सिल्क क्लॉथ मर्चेंट काउंसिल एंड एसोसिएशन, भारतीय रेशम संघ (प्रतिनिधि), अखिल भारतीय बुनकर संघ (प्रतिनिधि), कर्नाटक इनर वियर एसोसिएशन को शामिल किया गया। आन्दोलन को गति देने के लिए संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया गया। इसमें अध्यक्ष अनुराग सिंघला, सचिव सज्जनराज मेहता, उपाध्यक्ष प्रकाश पिरगल व बी. सत्यनारायण, संयुक्त सचिव योगेश सेठ, कोषाध्यक्ष महेंद्र एमके., सदस्य दिलीप पंजाबी व सदस्य दिलीप जैन को मनोनीत किया गया।
मंत्री सज्जनराज मेहता ने बताया कि सभा में कपड़ा उद्योग से जुड़े काफी सदस्य उपस्थित थे। बैठक में विस्तृत चिंतन हुआ। रणजीत बोथरा, नाहरमल मांडोत, ओकचंद पी. बोहरा, गिरीश, नरेश मूथा, गौतमचन्द पोरवाल, कैलाश बालर, राजेश चावत, ओमप्रकाश हेड़ा और संयुक्त समिति के नए सभी पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री, वित्त मंत्रालय, कपड़ा मंत्रालय, मुख्यमंत्री कार्यालय, सांसदों, विधायकों से जीएसटी दरें यथावत रखने के लिए आग्रह करने का निर्णय किया। साथ ही व्यापारियों व उद्यमियों की जायज मांग को जीएसटी काउंसिल तक पहुंचाने के लिए समर्थन मांगा।
मेहता ने बताया कि जीएसटी काउंसिल की बैठक ३१ दिसम्बर को दिल्ली में होगी। मेहता ने उम्मीद जताई कि सभी राज्यों की कपड़ा और गारमेंट एसोसिएशनों की महेनत रंग ला सकती है और प्रधानमंत्री व केन्द्रीय वित्त मंत्री, कपड़ा व गारमेंट पर जीएसटी दरों के लिए जारी नोटिफिकेशन पर पुर्नविचार कर जीएसटी की दरें यथावत रखने पर सहमति प्रदान कर सकते हैं। गौरतलब है कि आजादी के बाद केन्द्र सरकार ने कपड़े जैसी मूलभूत वस्तु पर भी भारी भरकम कर लगाने का निर्णय कर किया है। व्यापारियों का मानना है कि इस अन्याय पूर्ण कदम के खिलाफ देशव्यापी आन्दोलन के मद्देनजर विधानसभा व लोकसभा में चर्चा कर सरकार को इस पर सकारात्मक रूप से पुर्नविचार करना चाहिए।