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पहले हाथी देखभाल केंद्र में उपचार करा रहे चार हाथी

- मोटापा, मधुमेह सहित अन्य स्वास्थ्य समस्याएं

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An Elephant fell into a well in Chittoor, rescued by officials, Video

बेंगलूरु. कोलार जिले के हाथी देखभाल केंद्र (Elephant Care Center) में चार हाथियों का उपचार जारी है। इन्हें मोटापा, मधुमेह (obesity, diabetes) सहित अन्य चोटें और बीमारियों की शिकायत है। ये हाथी Karnataka के नंजनगुड, तमिलनाडु, केरल और गोवा से हैं। राज्य में अपनी तरह का यह पहला केंद्र है और जल्द ही आम लोग भी इसका भ्रमण कर सकेंगे। हाथियों को भोजन खिला सकेंगे।

लक्ष्मीपुर आरक्षित वन में 20-25 एकड़ में फैले इस केंद्र की स्थापना सितंबर में आठ हाथियों को रखने की क्षमता के साथ की गई थी। लेकिन, अब विभाग अधिक हाथियों को समायोजित करने के लिए केंद्र का विस्तार कर रहा है। केंद्र का एक हिस्सा ही आम लोगों के लिए खोला जाएगा।

पशु चिकित्सकों के अनुसार शिविर और मंदिर के हाथियों (Temple Elephant) में उनके आहार और सीमित शारीरिक व्यायाम के कारण मधुमेह, मोटापा, पाचन विकार, गठिया, पैरों में सूजन आम है। यही कारण है कि ऐसे हाथियों को चोट लगने पर ठीक होने में काफी समय लगता है। केंद्र में जानवरों को विशेष चिकित्सा देखभाल के साथ विशिष्ट आहार दिया जाता है। उनके शरीर के अनुसार व्यायाम कराया जाता है।

उप वन संरक्षक वी. येदुकोंडालु ने बताया कि केंद्र में हाथियों के रहने की अलग व्यवस्था और टहलने के लिए पर्याप्त जगह है। अन्य बचाव केंद्रों के विपरीत, इसमें हाथियों को धूप और बारिश से बचाने के लिए खुले और बंद स्थान हैं। महावतों, वनकर्मियों और पशु चिकित्सकों के लिए विशेष इकाइयां बनाई गई हैं। हाथियों के इलाज के लिए गैर-सरकारी संगठनों के साथ काम करने वाले पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों को भी लगाया गया है।

हाथियों को दिन में दो बार नहलाया जाता है। रागी, धान, हरी घास और फलों सहित अन्य पौष्टिक भोजन खिलाया जाता है। एक आधुनिक किचन बनाया गया है, जहां रोजाना दो बार रागी मुद्दे तैयार किए जाते हैं।


कोप्पल को मिला पहला वन्यजीव अभयारण्य
- बांकापुर भेड़िया वन्यजीव अभयारण्य अधिसूचित

बेंगलूरु@पत्रिका. राज्य सरकार ने कोप्पल जिले में बांकापुर भेड़िया वन्यजीव अभयारण्य (Bankapur Wolf Wildlife Sanctuary) को अधिसूचित किया है। यह मुख्य रूप से भारतीय भूरे भेड़िये को संरक्षण और सुरक्षित पर्यावास देने के लिए बनाया गया है।

जिले के कनकगिरी और गंगावती तालुक में 332.68 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैले इस अभयारण्य में कई वन्यजीवों का प्राकृतिक वास है। इनमें मुख्य रूप से भारतीय भूरे भेड़िये, गीदड़, धारीदार लकड़बग्घे, सियार और लोमड़ी आदि शामिल हैं लेकिन, भारतीय भूरे भेड़िये सबसे बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। जैविक दबाव और प्राकृतिक कारणों से पूरे देश में भेड़ियों के आवास तेजी से घट रहे हैं।

राज्य के उत्तरी क्षेत्र को छोड़ कर अधिकांश भागों से भेड़िये लुप्तप्राय हो चुके हैं। मेलकोट क्षेत्र को देश में भेड़ियों के लिए पहला संरक्षित क्षेत्र कहा जाता है। मेलकोट भेड़िया अभयारण्य कथित तौर पर मैसूर के महाराजाओं द्वारा स्थापित किया गया था।

हालाँकि एक दशक से अधिक समय से इस क्षेत्र में भेड़ियों की मौजूदगी का कोई प्रमाण नहीं है। इस क्षेत्र में पानी की कमी को झुंडों के जबरन प्रवास के संभावित कारण के रूप में बताया गया है।


भेड़ियों के दो झुंड किए स्थानांतरित

इसके बाद, भेड़ियों के दो झुंड इस क्षेत्र में स्थानांतरित किए गए थे। वन अधिकारियों के अनुसार बांकापुर, मल्लापुर और सुलेकल गांव के भीतर आने वाले जंगल में चट्टानी पहाड़ी और कंटीली वनस्पति शामिल हैं। भारतीय भूरे भेड़िये डेक्कन के पठार में शुष्क घास के मैदान में रहते हैं और काले हिरण व अन्य शाकाहारी जानवरों का शिकार करते हैं।