
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने गुरुवार को राष्ट्रीय ध्वज से अलग राज्य के स्वतंत्र ध्वज को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। हालांकि, प्रस्तावित राज्य ध्वज के लिए अभी राज्य सरकार को गृह मंत्रालय से अनुमति लेनी पड़ेगी। राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे की तरह राज्य का प्रस्तावित ध्वज भी तीन रंगों का होगा और इसके बीच में भी सफेद रंग ही होगा। राजनीतिक हलकों में सरकार के इस कदम को दो महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कन्नड़ गौरव और अस्मिता को भुनाने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। स्थानीय गौरव से जुड़ा होने के कारण मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा सरकार के इस कदम के खिलाफ मुखर नहीं हो पा रही है।
केंद्र की मंजूरी अनिवार्य
ध्वज समिति की सिफारिश पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या की अध्यक्षता में गुरुवार सुबह आवासीय कार्यालय कृष्णा में हुई कन्नड़ संगठनों, साहित्यकारों और अधिकारियों की बैठक में प्रस्तावित ध्वज को मंजूरी देने का निर्णय लिया गया। समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित ध्वज को मंजूरी के लिए गृह मंत्रालय के पास भेजने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर प्रस्तावित ध्वज का अनावरण भी किया।
बाद में मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे लोगों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई और अलग ध्वज का सपना साकार हुआ। सिद्धरामय्या ने कहा कि सरकार अलग ध्वज के मांग से सहमत है और उसने पिछले साल ही ध्वज के रंग और चिह्न पर विचार करने के लिए समिति बनाईथी। इस समिति ने कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार-विमर्श करने के बाद ६ फरवरी को डिजाइन के साथ सरकार को रिपोर्ट सौंप दी थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि समिति की रिपोर्ट को मंत्रिमंडल ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को राज्य के लिए अलग ध्वज घोषित करने का अधिकार नहीं है, इसे केंंद्र सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा। हम केंद्र सरकार से इसे जल्द से जल्द मंजूरी देेने का आग्रह करेंगे।
राज्य का तिरंगा
राज्य से सरकार ने अगल ध्वज के लिए जिस डिजाइन को मंजूरी दी है उसमें लाल, सफेद और पीला रंग होगा। बीच की सफेद पट्टी पर राज्य का प्रतीक चिह्न श्वेत-श्याम में होगा। हालांकि, इसमें सत्यमेव जयते नहीं लिखेगा। समिति के सदस्यों के मुताबिक लाल रंग साहस, सफेद शांति और पीला शुभता और कन्नाडिग़ाओं के कल्याण का प्रतीक है।
जम्मू-कश्मीर के बाद दूसरा राज्य
अगर केंद्र सरकार राज्य के प्रस्तावित ध्वज को मंजूरी देती है तो जम्मू-कश्मीर के बाद अलग ध्वज वाला कर्नाटक देश का दूसरा राज्य होगा। संविधान लागू होने के बाद धारा 370 के तहत मिले दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर के अलग राज्य ध्वज है जबकि बाकी किसी राज्य का अगल ध्वज नहीं है। कर्नाटक सहित कुछ राज्यों के अलग गीत हैं और अलग ध्वज के समर्थक इसे भी एक आधार बताते हैं।
कई कन्नड़ संगठन विरोध में
एक तरफ सरकार ने आनन-फानन में अलग राज्य ध्वज को मंजूरी दे दी तो दूसरी कई कन्नड़ संगठन इसके खिलाफ में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक से बाहर निकले कुछ कन्नड़ संगठनों के नेताओं ने भी इसका विरोध किया। कन्नड़ चलुवलि वाटाल पक्ष के नेता वाटाल नागराज ने कहा कि ध्वज तय करने के लिए गइित समिति को इस झंडे के इतिहास व महत्व का ही पता नहीं है। लोग पहले से ही दो रंग वाले ध्वज को राज्य का झंडा मानते हैं, ऐसे में तीन रंग वाला झंडा हमें मंजूर नहीं है।
पिछले साल सरकार ने बनाई थी समिति
पिछले साल ६ जून को सरकार ने अलग ध्वज पर विचार करने के लिए नौ सदस्यीय समिति गठित की थी। हालांकि,करीबडेढ़ महीने बाद इसकी जानकारी सार्वजनिक हुईथी और इस पहल को लेकर काफी विवाद हुआ था। भाजपा ने सिद्धरामय्या सरकार पर चुनावी फायदे के लिए कन्नड़ अस्मिता और गौरव के नाम पर विभाजनकारी कदम उठाने का आरोप भी लगाया था। कन्नड़वादी कार्यकर्ताओं का एक समूह ने भी इसका विरोध किया। हालांकि, बाद में कन्नड़ गौरव पर सिद्धरामय्या सरकार के आक्रामक रूख के कारण राजनीतिक नुकसान की आशंका को देखते हुए भाजपा के स्थानीय नेताओं के सुर इसके खिलाफ मंद हो गए। पिछले साल राज्य सरकार के आदेश पर बेंगलूरु मेट्रो से हिंदी के संकेत और नाम पट भी हटा दिए गए थे।
वर्षों से कन्नड़ ध्वज का उपयोग
हालांकि, आधिकारिक दर्जा नहीं होने के बावजूद राज्य में कन्नड़ ध्वज का इस्तेमाल दशकों से हो रहा है। १ नवम्बर को राज्य स्थापना दिवस (कन्नड़ राज्योत्सव) और अन्य सरकारी कार्यक्रमों में लाल-पीले रंग वाले ध्वज को फहराया जाता है। इस ध्वज को कन्नड़ पक्ष नामक पार्टी के नेता व लेखक एम राममूर्ति ने बनाया था। २०१२ में डी वी सदानंद गौड़ा के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने गैर आधिकारिक ध्वज को ही आधिकारिक दर्जा दे दिया था। तब सरकार ने सरकारी भवनों और कार्यक्रम में गैर आधिकारिक तौर पर प्रचलित लाल-पीले रंग वाले कन्नड़ ध्वज को फहराने का आदेश दिया था लेकिन कर्नाटक उच्च न्यायालय में एक याचिका की सुनवाई के दौरान ध्वज की वैधानिकता को लेकर सवाल उठने पर आदेश वापस ले लिया था। इससे पहले दिसम्बर २०११ में भाजपा सरकार ने अलग राज्य ध्वज की मांग को खारिज कर दिया था। विधायक एस आर विश्वनाथ के सवाल के जवाब में तत्त्कालीन कन्नड़ व संस्कृति मंत्री गोविंद कारजोल ने विधानसभा में कहा था कि राष्ट्रीय ध्वज संहिता राज्यों के अलग ध्वज की अनुमति नहीं देती है।
अलग ध्वज असंवैधानिक नहीं
प्रस्तावित राज्य ध्वज असंवैधानिक नहीं है। संविधान या राष्ट्रीय ध्वज संहिता में राज्यों के अलग ध्वज होने पर कोई रोक नहीं है। हां, राष्ट्रीय ध्वज से ऊंचा कोई ध्वज नहीं फहराया जा सकता है और हम इसका पालन करेंगे। प्रस्तावित राज्य ध्वज नियमों के राष्ट्रीय ध्वज से कम ऊंचाई पर ही फहराया जाएगा।
सिद्धरामय्या,मुख्यमंत्री
Published on:
08 Mar 2018 07:40 pm
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