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ईश्वरप्पा का चुनावी राजनीति से संन्यास

जेपी नड्डा पार्टी को लिखा पत्र, पार्टी के लिए करते रहेंगे काम

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ईश्वरप्पा का चुनावी राजनीति से संन्यास

ईश्वरप्पा का चुनावी राजनीति से संन्यास

बेंगलूरु.
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केएस ईश्वरप्पा ने चुनावी राजनीति से संन्यास ले लिया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को लिखे पत्र में उनसे अनुरोध किया है कि 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनावों में उनकी उम्मीदवारी पर विचार नहीं करें।
चुनावी राजनीति से अलग होने की घोषणा करते हुए ईश्वरप्पा ने यह भी लिखा है कि उन्होंने विधान सभा चुनाव नहीं लडऩे का फैसला किया है। पार्टी ने उन्हें पिछले 40 वर्षों में कई जिम्मेदारियां दी हैं। वे पार्टी में बूथ अध्यक्ष से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक रहे। उन्हें उपमुख्यमंत्री बनने का भी सम्मान मिला है। उन्होंने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं के प्रति धन्यवाद भी व्यक्त किया है।
बाद में संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा की सरकारें बनी लेकिन, उसे अभी तक पूर्ण बहुमत नहीं मिला। राज्य की जनता ने बिना बहुमत के भी पार्टी को शासन करने का अवसर दिया। उनका एकमात्र इरादा पार्टी को राज्य में पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लाना है। बीएस येडियूरप्पा चार बार मुख्यमंत्री बने। उनके अलावा सदानंद गौड़ा, जगदीश शेट्टर, और बसवराज बोम्मई भी मुख्यमंत्री बने। वे अब चुनावी राजनीति से संन्यास ले रहे हैं लेकिन, पार्टी को पूर्ण बहुमत दिलाने के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी उन्हें सौंपेगी वे उसे निभाने को तैयार हैं।
भाजपा में नेताओं के चुनाव लडऩे या कोई पद हासिल करने के लिए अनौपचारिक अधिकतम उम्र सीमा 75 साल है। ईश्वरप्पा जून में 75 साल के हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे अपनी इच्छा से चुनावी राजनीति से संन्यास ले रहे हैं। उनपर इसके लिए कोई दबाव नहीं था। वे एक सामान्य पार्टी कार्यकर्ता के तौर पर काम करते रहेंगे और जो भी उन्हें जिम्मेदारियां दी जाएंगी वे उसे पूरा करेंगे। ईश्वरप्पा ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व से कहा था कि चुनावों में उन्हें टिकट देने पर विचार नहीं करें। लेकिन, पार्टी नेतृत्व ने उनसे कहा था कि वे चुनाव लड़ें। इसलिए उन्होंने पत्र लिखकर स्पष्ट कर दिया कि चुनाव नहीं लडऩे का फैसला किया है।
केएस ईश्वरप्पा शिवमोग्गा विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। अटकलें हैं कि उनकी जगह उनके बेटे को केई कांतेश को टिकट दिया जा सकता है। लेकिन, भाजपा पार्षद और वरिष्ठ नेता आयनुर मंजुनाथ भी शिवमोग्गा से ही पार्टी टिकट की दावेदारी कर रहे हैं। ईश्वरप्पा कह चुके हैं कि टिकट के मुद्दे पर वह पार्टी हाइकमान के फैसले का पालन करेंगे। इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियूरप्पा ने भी चुनावी राजनीति से संन्यास लिया था।