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शिक्षा नीति पर केंद्र और राज्य के बीच पीसना नहीं चाहते शिक्षाविद

-राय पर चुप्पी

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माउंट कार्मेल कॉलेज लड़कों को सभी कोर्स में देगा दाखिला

माउंट कार्मेल कॉलेज लड़कों को सभी कोर्स में देगा दाखिला

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को राज्य शिक्षा नीति से बदलने के मामले पर राज्य के ज्यादातर शिक्षाविदों ने चुप्पी साध रखी है। कोई भी टिप्पणी नहीं करना चाहता है। सरकार ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) को बदलने पर लिखित में उनकी राय मांगी है। अब तक एक भी कुलपति ने जवाब नहीं दिया है। ज्यादातर कुलपतियों के अनुसार वे किसी विवाद में नहीं पडऩा चाहते हैं।

कर्नाटक राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष प्रो. एस. गौड़ा ने बताया कि कुलपतियों से अब तक लिखित जवाब नहीं मिला है। उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. एम. सी. सुधाकर ने कहा कि कुलपतियों को लिखित में राय जमा करने के निर्देश दिए गए थे। यदि वे प्रतिक्रिया नहीं देते हैं, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि वे एनइपी के पक्ष में हैं।

आदेशों का पालन करना हमारा काम

नाम नहीं छापने की शर्त पर एक कुलपति ने कहा, हमारी भूमिका सरकार के आदेशों का सख्ती से पालन करना और उसे लागू करना है। सार्वजनिक रूप से किसी एक सरकार का पक्ष लेना जटिलताएं पैदा कर सकती हैं। यदि राज्य सरकार एनइपी को खत्म करने का फैसला करती है, तो हम इस पर खुलकर टिप्पणी किए बिना इसका पालन करेंगे।

असहज महसूस कर रहे थे कुलपति

राज्य के 41 में से 32 विश्वविद्यालय पहले ही एनइपी लागू कर चुके हैं। उच्च शिक्षा मंत्री का पद संभालने के बाद सुधाकर ने कुलपतियों के साथ बैठक कर एनइपी को राज्य शिक्षा नीति से बदलने पर उनकी राय मांगी थी। हालांकि, कई कुलपति असहज महसूस कर रहे थे। इसके बाद मंत्री ने लिखित में राय मांगी।

मार्क कार्ड पर उल्लेख नहीं

अगर राज्य सरकार एनइपी को खत्म कर देती है और राज्य शिक्षा नीति को फिर से लागू करती है, तो चार साल के ऑनर्स कोर्स को खत्म किया जा सकता है। कई छात्र पहले ही विभिन्न विश्वविद्यालयों में ऑनर्स पाठ्यक्रमों में दाखिला ले चुके हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि एनइपी का उल्लेख मार्क कार्ड पर नहीं किया जाएगा, इसलिए इसका छात्रों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। Karnataka में 430 सरकारी और 375 निजी प्रथम श्रेणी के कॉलेज हैं।

जल्द फैसला ले सरकार

एक अधिकारी ने कहा, राज्य सरकार फिलहाल एनइपी को पूरी तरह से खत्म नहीं कर सकती है। इसके बजाय, शुरुआत के लिए, एकाधिक निकास योजना को बंद किया जा सकता है। एनइपी के तहत विषयों का चयन जारी रह सकता है। डिग्री कॉलेजों के पाठ्यक्रम में तत्काल कोई बदलाव नहीं किया गया है। पांचवें और छठे सेमेस्टर का पाठ्यक्रम पहले ही विश्वविद्यालयों को भेजा जा चुका है। संबंधित विश्वविद्यालयों को अब छात्रों को पढ़ाने से पहले अपने अध्ययन बोर्ड के माध्यम से इसकी पुष्टि करनी होगी। इस बीच, छात्रों ने सरकार से जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की है।