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कर्नाटक ने CWMA को आमंत्रित किया, दिखाएंगे कावेरी बेसिन में बांधों की जमीनी हकीकत

राज्य का जलसंकट दिखाने के लिए प्राधिकरण को बांधों का दौरा करने का आमंत्रण दिया गया है। सरकार काेे उम्मीद है कि प्राधिकरण उनके अनुरोध का सम्मान करेगा और राज्य और उसके किसानों के हितों की रक्षा करेगा।

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dk shivkumar

बेंगलूरु. राज्य सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) को राज्य में पानी का संकट जानने और जमीनी हकीकत समझने के लिए कावेरी बेसिन के बांधों का दौरा करने का न्यौता दिया है।

जल संसाधन विभाग संभाल रहे उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने गुरुवार को दिल्ली में संवाददाताओं से कहा कि हमने राज्य का जलसंकट दिखाने के लिए प्राधिकरण को बांधों का दौरा करने को आमंत्रित किया है। उम्मीद है कि प्राधिकरण इस अनुरोध का सम्मान करेगा और राज्य और उसके किसानों के हितों की रक्षा करेगा।

इससे पहले शिवकुमार ने सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई की तैयारी पर चर्चा करने कानूनी टीम से मुलाकात की। उन्होंने कहा, बारिश की कमी और बांधों में कम जलप्रवाह को देखते हुए प्रतिदिन 5,000 क्यूसेक पानी छोडऩा एक चुनौती है। उन्होंने दोहराया कि मैकेदाटू संतुलन जलाशय इन सभी समस्याओं का एकमात्र समाधान है और जलाशय तमिलनाडु के हितों की भी रक्षा करेगा।

बारिश में 51.22 प्रतिशत की कमी

इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में अपने जवाब में, CWMA ने कहा कि 1 जून से 27 अगस्त के बीच चार बांधों (काबिनी, हरंगी, हेमावती और कृष्णराज सागर) में संचयी प्रवाह 97.14 TMCFT था, जो औसत संचयी प्रवाह की तुलना में करीब आधा ही है। पिछले 30 वर्षों में औसत संचयी प्रवाह 199.153 TMCFT था। इसका अर्थ है 51.22 प्रतिशत की कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि कावेरी बेसिन में संकट की स्थिति पिछले 15 दिन में बढ़ गई है और कावेरी बेसिन के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में वर्षा की कमी का प्रतिशत ज्यादा है। यह भी कहा गया कि कम बारिश के कारण कर्नाटक के जलाशयों में भंडारण कम हो गया है और राज्य को बेंगलूरु सहित बेसिन की पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए पानी का संरक्षण करना पड़ा है। वर्तमान लाइव स्टोरेज 62.85 TMCFT है, जो कुल लाइव स्टोरेज 104.55 TMCFT के मुकाबले 60.12 प्रतिशत ही है।

बिलिगुंडलु में भी संचयी प्रवाह कम

प्राधिकरण ने कहा कि 1 जून से 28 अगस्त के बीच बिलीगुंडलू में संचयी प्रवाह 30.252 TMCFT यानि 50.20 TMCFT की कमी, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा संशोधित सीडब्ल्यूडीटी के अंतिम निर्णय के अनुसार एक सामान्य वर्ष में 80.45 TMCFT का प्रवाह निर्धारित था।