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कर्नाटक : अगले साल से एक तिहाई हल्के हो जाएंगे स्कूल बैग

- स्कूली बच्चों को भारी बस्तों से राहत देने की कवायद

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कर्नाटक : अगले साल से एक तिहाई हल्के हो जाएंगे स्कूल बैग

कर्नाटक : अगले साल से एक तिहाई हल्के हो जाएंगे स्कूल बैग

बच्चों को उनके वजन से ज्यादा भारी बस्तों से राहत देने की कवायद में Karnataka सरकार पाठ्यपुस्तकों का आकार या वॉल्यूम लगभग एक तिहाई कम करेगी। इससे शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से school bag हल्के हो जाएंगे। स्कूल शिक्षा और साक्षरता मंत्री मधु बंगारप्पा ने रविवार को मेंगलूरु में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ने स्कूल बैग के वजन को काफी हद तक कम करने का एक तरीका निकाला है। पाठ्य सामग्री (कंटेंट) में कोई बदलाव नहीं होगा, लेकिन वॉल्यूम कम कर दिया जाएगा।

शिक्षकों पर अधिक तनाव, पर साल बेकार नहीं जाएगा

इस शैक्षणिक वर्ष से द्वितीय प्री-यूनिवर्सिटी और एसएसएलसी (राज्य बोर्ड 10वीं) के छात्रों के लिए तीन वार्षिक परीक्षाएं आयोजित करने पर, मंत्री ने कहा कि इससे छात्रों पर तनाव काफी कम हो जाएगा। उन्हें परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन करने और उच्च शिक्षा जारी रखने के अतिरिक्त अवसर मिलेंगे। साल बेकार नहीं जाएगा। इससे शिक्षकों पर अधिक तनाव होगा, लेकिन विद्यार्थियों के हितों को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है। तीनों परीक्षाओं में अर्जित सर्वश्रेष्ठ अंक निर्णायक होंगे।

500 नए केपीएस

राज्य सरकार ने 2,000 से अधिक नए कर्नाटक पब्लिक स्कूल (केपीएस) खोलने का प्रस्ताव दिया है। लगभग तीन ग्राम पंचायतों पर एक स्कूल होगा। अभी 300 केपीएस हैं और शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से 500 नए केपीएस शुरू होने वाले हैं। इन स्कूलों में एलकेजी से 12वीं कक्षा तक की कक्षाएं होंगी और न केवल शिक्षा बल्कि संगीत, कला, खेल और अन्य गतिविधियों पर भी जोर दिया जाएगा। शिक्षकों की कमी को दूर करने और सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे में अंतराल को भरने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। शिक्षकों के 53,000 रिक्त पदों में से सरकार ने 40,000 से अधिक अतिथि शिक्षकों को मंजूरी दी है।

तीनों परीक्षाएं निर्धारित समय से

तीन परीक्षाओं को पूरा करने में लगने वाले समय के कारण डिग्री पाठ्यक्रमों में प्रवेश से वंचित होने वाले छात्रों के बारे में पूछे जाने पर, मंत्री ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट रूप से कार्यक्रम निर्धारित किया है। तीनों परीक्षाएं निर्धारित समय से आयोजित होंगी। कॉलेजों से कहा गया है कि वे इन छात्रों को प्रवेश दें और उनके लिए ब्रिज कोर्स संचालित करें। प्रस्तावित राज्य शिक्षा नीति के तहत कॉलेजों में इन छात्रों को आवश्यक अवसर प्रदान करने की व्यवस्था होगी।