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कर्नाटक अलमट्टी बांध से तुरंत पानी छोड़े : मेधा पाटकर

सिद्धरामय्या को पत्र लिखकर महाराष्ट्र में बाढ़ रोकने के लिए भेजा एसओएस संदेश! अलमाटी बांध का जलाशय अपनी क्षमता का 90 प्रतिशत तक भर चुका है और जलस्तर लगभग 519 मीटर के करीब है। यदि भारी बारिश होती है तो अतिरिक्त पानी निश्चित रूप से पहले कोल्हापुर और फिर सांगली में बाढ़ लाएगा, जैसा कि 2005 और 2021 में हुआ था। आपदा टालने के लिए तुरंत दो लाख क्यूसेक पानी छोडऩे का अनुरोध

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बेंगलूरु. पीपुल्स मूवमेंट्स नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी की मेधा पाटकर ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या को अलमट्टी बांध से तुरंत पानी छोडऩे के लिए एक एसओएस भेजा है क्योंकि ऐसा नहीं करने पर महाराष्ट्र के कोल्हापुर और सांगली जिलों को विनाशकारी बाढ़ का सामना करना पड़ेगा।

सिद्धरामय्या को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि अलमट्टी बांध का जलाशय अपनी क्षमता का 90 प्रतिशत तक भर चुका है और जलस्तर लगभग 519 मीटर के करीब है। यदि भारी बारिश होती है (जलवायु परिवर्तन के कारण संभावित) तो अतिरिक्त पानी निश्चित रूप से पहले कोल्हापुर और फिर सांगली में बाढ़ लाएगा, जैसा कि 2005 और 2021 में हुआ था। उन्होंने निश्चित आपदा टालने के लिए सिद्धरामय्या से तुरंत दो लाख क्यूसेक पानी छोडऩे का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि पिछली बाढ़ से हुए नुकसान से लोग अभी भी पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

पाटकर ने आरोप लगाया कि बड़े बांध जलाशयों के नियमन और निगरानी से संबंधित केंद्रीय जल आयोग के नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नियमानुसार अलमट्टी जलाशय को 31 जुलाई तक 50त्न भंडारण क्षमता और 31 अगस्त तक 77 और सितंबर के अंत तक 100 प्रतिशत ही रखा जाना है। इस नियम का उल्लंघन हो चुका है और जलस्तर 518 मीटर से भी ऊपर चला गया है।

पानी नहीं छोड़ा तो तबाही

उन्होंने कहा, अगर यहां और अभी अलमट्टी से 2 लाख क्यूसेक तक डिस्चार्ज नहीं होता है, तो महाराष्ट्र में बाढ़ आ सकती है। जुलाई के आखिरी हफ्ते में ही कोल्हापुर के जिला प्रशासन ने बड़ी संख्या में ही नहीं बल्कि आबादी के लिए भी अलर्ट जारी कर दिया था। अपेक्षित बाढ़ और जलमग्नता से सुरक्षा के लिए घरों की संख्या लेकिन यहां तक कि कलेक्टर कार्यालय को भी खाली कर दिया गया था। आज स्तर इससे भी ऊपर चला गया है। सीडब्लूसी नियमों का खुला गैर-अनुपालन स्वीकार्य नहीं है।

करोड़ों रुपए के नुकसान की चेतावनी

पाटकर ने कहा कि इस गंभीर मुद्दे पर कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच कोई अंतरराज्यीय टकराव नहीं होना चाहिए। बल्कि नियमों का सख्ती से पालन होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम निश्चित रूप से कर्नाटक की पानी की आवश्यकता के प्रति असंवेदनशील नहीं हैं, लेकिन हम बाढ़ के कारण करोड़ों रुपए के नुकसान का सामना नहीं करना चाहेंगे। महाराष्ट्र के विशेषज्ञों का आरोप है कि कर्नाटक में बैराज बढऩे से स्थिति जटिल हो गई है।