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कर्नाटक : कब्बन पार्क का प्राकृतिक परिवेश खराब करने के आरोप

- पार्क समूहों कहा : पहले की तरह नहीं रहा बाल भवन- पक्षियों को देखना अब बीते दिनों की बात

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कर्नाटक : कब्बन पार्क का प्राकृतिक परिवेश खराब करने के आरोप

बेंगलूरु. विभिन्न कब्बन पार्क समूहों ने बेंगलूरु स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त की है। इनके अनुसार सरकारी निकाय ने बाल भवन के प्राकृतिक परिदृश्य को खराब कर दिया है। नागरिकों का कहना है कि बांस के झुरमुट और देशी पेड़ों की प्रजातियों को फिर से लगाने के बजाय ताड़ के पेड़ लगाए जा रहे हैं। प्राकृतिक घास के स्थान पर व्यावसायिक लॉन शुरू किए जा रहे हैं और मिट्टी के साथ अधिक खुले स्थान के बजाय क्षेत्र को कंक्रीट किया जा रहा है।

सदस्यों ने यह भी शिकायत की कि बाल भवन की मौलिकता पूरी तरह से खो गई है। नागरिक समूहों को बाल भवन के काम में शामिल नहीं किया गया। बाल भवन व इसके आसपास पैराडाइज फ्लाई कैचर, रेड किंगफिशर, बुलबुल, रॉबिन्स और वैग्टेल जैसे पक्षियों को देखना बीते दिनों की बात हो गई है।

'वी लव कब्बन पार्क' समूह के एक सदस्य ने कहा कि मई 2020 में बांस के झुरमुटों को हटाए जाने के बाद बताया गया था कि उन्हें फिर से लगाया जाएगा और क्षेत्र की मूल जैव विविधता और पारिस्थितिकी को बहाल किया जाएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। पहले और अब की स्थिति में काफी अंतर है। पार्क अब एक कॉर्पोरेट परिसर बन चुका है।

बाल भवन में विशेष बच्चों के लिए जगह बनाने वाली माइंडट्री के सलाहकार और पर्यावरणविद् सुरेश हेब्लीकर ने कहा कि उन्होंने प्राकृतिक स्थान सुनिश्चित करने का सुझाव दिया था। वे सरकार को बांस व स्थानिक पेड़ों के महत्व से भी अवगत कराएंगे।

स्मार्ट सिटी प्रबंधन ने आरोपों को नकारा

बेंगलूरु स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पी. राजेंद्र चोलन ने बताया कि ताड़ केवल टॉय ट्रेन की पटरियों और सड़कों के किनारे लगाए जा रहे हैं। कोई पेड़ या बांस नहीं हटाया गया। नागरिक और बागवानी विभाग के इनपुट लिए जा रहे हैं। लेकिन, बहुत सारे समूह हैं। इसलिए कुछ को छूटा हुआ महसूस हो सकता है। थीम आधारित बच्चों के सीखने के स्थान बनाए जा रहे हैं और एक एम्फीथिएटर स्थापित किया जा रहा है। बाल भवन बच्चों के आनंद लेने और सीखने के लिए है। हम महिला एवं बाल कल्याण विभाग के साथ भी काम कर रहे हैं।