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बेंगलूरु।'हाथी को पालना सरल है, उसे खिलाना मुश्किल है की लोकोक्ति से जूझ रहे राज्य के वन विभाग को उत्तराखंड के उस मांगपत्र ने बड़ी राहत पहुंचाई है, जिसके तहत उसने अपने विश्व विख्यात जिम कार्बेट नेशनल पार्क की खातिर कर्नाटक से हाथी मांगे हैं।
अब प्रदेश के वन विभाग ने उत्तराखंड को 12 जम्बो गिफ्ट देने की प्रक्रिया शुरू भी कर दी है, जोकि आखिरी चरण में है। शीघ्र ही इन हाथियों को आवश्यक प्रशिक्षण देने के बाद उत्तराखंड रवाना कर दिया जाएगा। इसके लिए जू अथारिटी ऑफ इंडिया और वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से मंजूरी ले ली गई है। जिक्रयोग्य है कि वन्य जीवों और आम जनजीवन के बीच संघर्ष को टालने के मंतव्य से प्रदेश के वन विभाग ने बड़ी संख्या में हाथियों को पकड़ा है। राज्य भर में बने सूखे के हालातों के बीच इनके लिए भोजन पानी का इंतजाम कर पाना टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। आबादी क्षेत्रों से पकड़े गए करीब 200 हाथी बन्नेरघट्टा, माठीगोडु, डोड्डा हार्वे और दुबेर एलिफेंट कैंपों में रहे रहे हैं।
2500 किमी का सफर
वन, पर्यावरण एवं पारिस्थितकी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव टी.एम. विजय भास्कर ने बताया कि उत्तराखंड जाने वाले हाथियों का चयन हो गया है और जल्द ही पशु चिकित्सकों की टीम उनके स्वास्थ्य का निरीक्षण करेगी।
विशेषज्ञों की मानें तो करीब 2500 किलोमीटर के सफर के दौरान हाथियों की सेहत का ध्यान रखना चुनौती होगी। उन्हें ले जाने के लिए स्थानीय महावत और सहयोगियों का दल जाएगा।
फारेस्ट तथा प्रोजेक्ट एलिफेंट के चीफ कंजरवेटर दिलीप कुमार दास ने बताया कि उत्तराखंड जाने वाले 12 हाथियों के दल में 4 मादा और 8 नर हाथी शामिल हैं।
वन मंत्री ने दिल्ली में रखा था प्रस्ताव
प्रदेश के वनमंत्री बी. रमानाथ रई ने बताया कि हाल ही में नई दिल्ली में देश के सभी राज्यों के प्रधान मुख्य वन संरक्षकों के सम्मेलन में उन्होंने हाथियों को गोद लेने की अपील की थी।जिस पर विभिन्न राज्यों की ओर से सकारात्मक रुख मिला था। इसके बाद उत्तराखंड ने हाथी गोद लेने की मंशा से पत्र भेजा, जिसे स्वीकारते हुए सभी जरूरी अनुबंध होने के बाद 12 हाथियों के दल को जिम कार्बेट नेशनल पार्क के लिए भेजा जा रहा है।उत्तर भारत के राज्यों के अलावा मध्यप्रदेश और गुजरात से भी हाथियों के मांग की आशा है।
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