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कृषि ऋण माफी के लिए फिर केेंद्र की चौखट पर कुमारस्वामी

दिल्ली प्रवास पर गए कुमारस्वामी ने बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से मुलाकात की

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कृषि ऋण माफी के लिए फिर केेंद्र की चौखट पर कुमारस्वामी

बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने राज्य बजट में घोषित कृषि ऋण माफी योजना को लागू करने के लिए एक बार फिर केंद्र सरकार से मदद मांगी है। दिल्ली प्रवास पर गए कुमारस्वामी ने बुधवार को केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह से मुलाकात की और उन्हें योजना के लिए मदद मांगी।

5 जुलाई को पेश बजट में कुमारस्वामी ने 34 हजार करोड़ रुपए के ऋण माफी की घोषणा की थी लेकिन बाद मेें सरकार ने 10 जुलाई तक लिए गए 1 लाख रुपए के सहकारी कृषि ऋण भी माफ करने की घोषणा की थी जिसके कारण ऋण माफी का वित्तीय बोझ बढ़कर 40 हजार करोड़ रुपए हो गया।

सिंह के साथ मुलाकात में कुमारस्वामी ने कहा कि पिछले आठ साल से सूखे की स्थिति के कारण राज्य के किसान ऋण के बोझ तले दबे थे इसीलिए सरकार को ऋण माफी का कदम उठाना पड़ा। सिंह को दिए गए ज्ञापन में कुमारस्वामी ने कहा कि ऋण माफी से राज्य सरकार पर 40 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का भार पड़ेगा इसलिए राज्य को केंद्रीय मदद की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने सहकारी संस्थाओं के बेहतर तरीके से काम करना सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय कृषि व ग्रामीण विकास (नाबार्ड) से मिलने वाले रियायती पुर्नवित्त को 40 से बढ़ाकर 70 फीसदी करने की मांग की। कुमारस्वामी ने कहा कि इससे छोटे और सीमांम किसानों को ज्यादा मदद उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही कुमारस्वामी ने फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के सूत्र में भी बदलाव करने की अपील की ताकि किसानों को ज्यादा लाभ मिल सके।

कुमारस्वामी ने सुझाव दिया कि केंद्र सरकार को टमाटर, प्याज और आलू जैसे बागवानी उत्पादों के लिए भी न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करना चाहिए। कुमारस्वामी ने केंद्र सरकार से राज्य में नारियल और सुपारी उत्पादकों को हुए 2477.26 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज देने की भी मांग की। कुमारस्वामी ने सिंह को बताया कि राज्य में 1.37 लाख हेक्टेयर में नारियल और 95 हजार 352 हेक्टेयर में सुपारी की फसल खराब हुई, जिससे राज्य के किसानों को 9909.6 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

कुमारस्वामी ने सिंह को बताया कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों को प्राथमिकता दे रही है ताकि 2022 तक किसानों की आय दुगुनी की जा सके। पिछले 8 साल के दौरान 6 बार राज्य में सूखा घोषित होने के कारण किसानों को प्रतिकूल हालात का सामना करना पड़ रहा है।